बागेश्वर : कल 13 अक्टूबर से नुमाइश खेत में लगने जा रहे सहकारिता मेले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों और संगठनों ने बाहरी व्यापारियों को अनुमति देने के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि यदि मेले में केवल स्थानीय दुकानदारों को मौका नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
बाहरी व्यापारियों को अनुमति मिली तो होगा बड़ा आंदोलन
व्यापार संघ बागेश्वर के अध्यक्ष सूरज जोशी और सचिव देव अधिकारी ने प्रशासन से मुलाकात कर साफ कहा कि मेले में सिर्फ स्थानीय दुकानदारों को दुकान लगाने की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बाहरी व्यापारी यहां दुकान लगाएंगे तो इसका भरपूर विरोध किया जाएगा। व्यापार संघ का कहना है कि लोकल फॉर वोकल के नारे को धरातल पर उतारने के बजाय प्रशासन बाहर से व्यापारी बुलाकर स्थानीय व्यापारियों के अधिकारों को कमजोर कर रहा है।
सहकारिता मेले में हो रही है करोड़ों की हेराफेरी : बालकृष्ण
स्थानीय निवासी और कांग्रेस नेता बालकृष्ण ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “सहकारिता मेले के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी हो रही है। प्रशासन को स्थानीय टेंट व्यवसायी तक नजर नहीं आते, जबकि जनपद में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता का मतलब स्थानीय उत्पादक होता है, लेकिन यहां तो मेरठ, मुजफ्फरनगर और बरेली से ठेकेदारी में व्यापारी बुलाए जा रहे हैं। ये स्थानीय व्यापारियों, उत्पादकों और समितियों के साथ घोर अन्याय है।
प्रशासन पर उठे सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग
बालकृष्ण ने आगे कहा कि यदि बाहरी व्यापारियों को हटाया नहीं गया और मेले में स्थानीय उत्पादकों, एनजीओ, समितियों और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों को जगह नहीं दी गई तो वह उग्र विरोध करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और सहकारिता विभाग की होगी। उन्होंने धन सिंह रावत को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सहकारिता मंत्री को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा।
स्थानीय व्यापारियों की मांगें:
मेले में केवल स्थानीय दुकानदारों और उत्पादकों को अनुमति दी जाए।
बाहरी ठेकेदारों और व्यापारियों को अनुमति न मिले।
स्थानीय एनजीओ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए।
सहकारिता मेले की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।








