बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), बागेश्वर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में शिक्षक कला, क्राफ्ट और खिलौना आधारित गतिविधियों के जरिए शिक्षण को अधिक रोचक, सृजनात्मक और बाल-केंद्रित बनाने का अभ्यास कर रहे हैं। ‘Integrated Learning हेतु Child-Centred Teaching-Learning Material (TLM) निर्माण एवं Art, Craft तथा Toy-Based Pedagogy का प्रयोग’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, बाल-केंद्रित एवं अनुभवात्मक अधिगम तथा कला-एकीकृत शिक्षण की अवधारणाओं से परिचित कराया गया। साथ ही NCERT की कक्षा छह से आठ तक की पाठ्यपुस्तकों को आधार बनाकर विभिन्न विषयों को कला से जोड़ने की संभावनाओं पर गतिविधियां कराई गईं।
दूसरे दिन पपेट्री को शिक्षण-अधिगम सामग्री के रूप में प्रयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया। विषय विशेषज्ञों ने पपेट निर्माण का प्रदर्शन किया, जिसके बाद शिक्षकों ने स्वयं पपेट तैयार किए। पपेट के माध्यम से कहानी-कथन, विषयवस्तु प्रस्तुतीकरण और पाठ्यक्रम आधारित गतिविधियों को रोचक बनाने का अभ्यास कराया गया। शिक्षकों ने जाना कि पपेट बच्चों के मनोरंजन के साथ उनकी सहभागिता और अभिव्यक्ति बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।
तीसरे दिन कोलाज और पेपर क्राफ्ट के जरिए सीखने को रचनात्मक बनाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को कोलाज निर्माण की विभिन्न तकनीकों के साथ स्थानीय और कम लागत वाली सामग्री के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। NCERT आधारित शैक्षिक कोलाज तैयार करने के साथ समूह गतिविधियों के माध्यम से कला-कौशल को विभिन्न विषयों की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने का अभ्यास कराया जा रहा है।
कार्यशाला के चौथे दिन पेपर माशे और टॉय बेस्ड पेडागॉजी पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षक पेपर माशे से त्रिआयामी शिक्षण-अधिगम सामग्री एवं मॉडल तैयार करने के साथ शैक्षिक खिलौनों के निर्माण और कक्षा-कक्ष में उनके उपयोग का अभ्यास करेंगे।
पांचवें एवं अंतिम दिन सीखी गई तकनीकों को एकीकृत करते हुए लेसन प्लान तैयार किए जाएंगे। शिक्षक कला, क्राफ्ट और खिलौना आधारित गतिविधियों को NCERT पाठ्यक्रम से जोड़कर इंटीग्रेटेड लेसन प्लान तैयार करेंगे और माइक्रो-टीचिंग के माध्यम से उनका प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही TLM प्रदर्शनी, पीयर फीडबैक और रिफ्लेक्शन जैसी गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे बाल-केंद्रित, अनुभवात्मक और रचनात्मक शिक्षण-साधन विकसित करने में सक्षम बनाना है, जिनसे बच्चे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को गतिविधियों के माध्यम से सहजता से समझ सकें।







