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वन्यजीव सप्ताह पर जागरूकता कार्यक्रम में मानव-वन्यजीव संघर्ष और जैव विविधता संरक्षण पर हुई चर्चा

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बागेश्वर। वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वन्यजीव सप्ताह के तहत शुक्रवार को चिंतन-मंथन सभागार, बागेश्वर में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य के निर्देश पर किया गया।

कार्यक्रम में वन विभाग के कार्यालयी एवं फील्ड स्टाफ के साथ सरस्वती शिशु मंदिर कठायतवाड़ा के छात्र-छात्राओं और विभिन्न ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन वन क्षेत्राधिकारी बागेश्वर श्याम सिंह करायत के नेतृत्व में हुआ।

इस दौरान विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों को वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन के महत्व की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में आमजन की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए जागरूकता और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

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स्लोगन के जरिए दिया संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्र-छात्राओं ने विभिन्न स्लोगन और संदेशों के माध्यम से वन, पर्यावरण एवं वन्यजीवों की सुरक्षा का संदेश दिया। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों ने प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी सोच और संवेदनशीलता भी प्रदर्शित की।

कार्यक्रम में मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए। वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों और ग्रामीणों को वन्यजीवों के महत्व तथा उनके संरक्षण में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।

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‘पहाड़ी बाग’ ने साझा किए अनुभव

पर्यावरण, कृषि, बागवानी और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सोशल मीडिया के माध्यम से सक्रिय गिरीश पांडे ‘पहाड़ी बाग’ ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर जन-जागरूकता की जरूरत पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में कृषि एवं बागवानी के अभिनव प्रयासों से जुड़े अनुभव भी विद्यार्थियों और ग्रामीणों के साथ साझा किए।

जनभागीदारी को बताया जरूरी

कार्यक्रम में क्रासी बुंगा के सरपंच प्रमोद बिष्ट, बामनभिड़ी के सरपंच भगवान सिंह समेत विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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वक्ताओं ने कहा कि वन और वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने के लिए ग्रामीणों और नई पीढ़ी को जागरूक करना जरूरी है।

वन्यजीव सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों को वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहते हुए वन एवं वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की गई।

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