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शिवालिक कॉरिडोर डी नोटिफाई मामले मे,23 फरवरी को होगी सुनवाई

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स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-

उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने विकास के नाम पर शिवालिक कॉरिडोर को ड़ी नोटिफाइ करने और दिल्ली देहरादून एन.एच.के चौड़ीकरण करने के मामले में दायर दो अलग अलग जनहीत याचिकाओ पर सुनवाई करते हुए इसे पर्यावरण से जुड़ा मामला माना और इसे विस्तार से सुनना आवश्यक समझा, क्योंकि पर्यावरण क्षति की भरपाई नही की जा सकती है ।

न्यायालय ने कहा कि विकास या पैसे की भरपाई अन्य माध्यमो से भी की जा सकती । आज मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सजंय कुमार मिश्रा और आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इस मामले को विस्तार से सुनना आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को निहित की है। आज सरकार की तरफ से कहा गया कि पूरा एन.एच.का कार्य पूर्ण होने को है जबकि 3 किलोमीटर राजाजी नैशनल पार्क का बचा हुआ है। इसलिए जनहित याचिका को शीघ्र निस्तारित किया जाय। क्योंकि प्रधानमंत्री जी इसका उद्घाटन करने वाले है और इसके पूर्ण होने से दिल्ली देहरादून का सफर दो घण्टे के भीतर किया जा सकता है।

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इसके लंबित होने से सरकार की कई योजनाएं प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उत्तराखण्ड को 3 किलोमीटर हाइवे मिल रहा है और यह तीन किलोमीटर राजाजी नैशनल पार्क के क्षेत्र में आ रहा है। तीन किलोमीटर के भीतर करीब 8000 पेड़ कट रहे है जिसमे 1622 पेड़ साल के लगभग डेढ़ सौ साल पुराने है। जिससे विकास को कम पर्यावरण को ज्यादा नुकसान हो रहा है।

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इसलिए हाइवे को दूसरी जगह से बनाया जाय।मामले के अनुसार अमित खोलिया व रेनू पोल ने जनहित याचिकाएँ दायर कर कहा है कि 24 नवम्बर 2020 को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में प्रदेश के विकास कार्यो को बढ़ावा देने के लिए देहरादून जोलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार करने लिए शिवालिक एलिफेंट रिजर्व फारेस्ट को डी-नोटिफाइड करने का निर्णय लिया गया। जिसमे कहा है कि शिवालिक एलिफेंट रिजर्व के डी नोटिफाइएड नही करने से राज्य की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित हो रही है लिहाजा इसे डी नोटिफाइएड करना अति आवश्यक है। इस नोटिफिकेशन को याचिकाकर्ताओ द्वारा कोर्ट में चुनोती दी गयी।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि शिवालिक एलीफेंट कॉरिडोर 2002 से रिजर्व एलिफेंट कॉरिडोर की श्रेणी में सामील है, जो करीब 5405 स्क्वायर वर्ग किलोमीटर में फैला है और यह वन्यजीव बोर्ड द्वारा भी डी नोटिफाइएड किया गया क्षेत्र है। उसके बाद भी बोर्ड इसे डी नोटिफाइएड करने की अनुमति कैसे दे सकता है।

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वहीं दूसरी जनहित याचिका में कहा गया है कि दिल्ली से देहरादून गनेशपुर के लिए नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण करने से राजाजी नेशनल पार्क के इको सेंसटिव जोन का 9 हैक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हो रहा है जिसमे लगभग 2500 पेड़ साल के है जिनमे से कई पेड़ 100 से 150 साल पुराने है। जिन्हें राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया है।जबकि उत्तराखण्ड को केवल तीन किलोमीटर का हाइवे मिल रहा है।

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