बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बागेश्वर में थिएटर इन एजुकेशन पर आधारित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डायट प्राचार्य श्री चक्षुष्पति अवस्थी ने की।
प्राचार्य अवस्थी ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि विद्यालयी शिक्षा में थिएटर बच्चों की अभिव्यक्ति, संवाद क्षमता, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास को अत्यंत प्रभावी ढंग से विकसित करता है। नई शिक्षा नीति 2020 कला-एकीकृत एवं अनुभव-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देती है, और यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम समन्वयक श्री रवि कुमार जोशी ने बताया कि जिले के तीनों विकासखंडों के 40 प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक इस प्रशिक्षण का हिस्सा बने हैं। थिएटर इन एजुकेशन कक्षा को जीवंत, सहभागी और बाल-केंद्रित बनाता है। शिक्षक स्वयं अनुभव करते हुए सीखेंगे कि सीखने को खेल, भूमिका-अभिनय, कहानी-अभिनय और नाट्य-गतिविधियों के माध्यम से कैसे सरल व आनंददायक बनाया जा सकता है।
संदर्भदाता डिंपल मेहता एवं सिमरन नागपाल सोल डाइट फाउंडेशन नई दिल्ली से हैं ।
डिंपल मेहता ने कहा कहा कि थिएटर बच्चों की रचनात्मकता, टीमवर्क और भावनात्मक समझ को विकसित करता है। भूमिका-अभिनय, कहानी-अभिनय और तत्कालिक अभिनय (इम्प्रोवाइजेशन) उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर सीखने का अवसर देता है।
संदर्भदाता सिमरन नागपाल ने कहा कि थिएटर आधारित शिक्षण से कक्षा तनाव-मुक्त होती है, बच्चों में आत्म-अभिव्यक्ति बढ़ती है और सीखना स्वाभाविक रूप से गहरा हो जाता है।
वक्ताओं ने बताया कि विश्व के कई देशों—जैसे ब्रिटेन, फ़िनलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका—में थिएटर को विद्यालयी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। ब्रिटेन में TIE मॉडल 1960 के दशक से सफलतापूर्वक चल रहा है; फिनलैंड में थिएटर को सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा का आधार माना गया है; ऑस्ट्रेलिया और जापान में कक्षा-गतिविधियों का मुख्य माध्यम है; वहीं अमेरिका में DBI पद्धति कई राज्यों में कक्षा का नियमित अंग है। भारत भी अब कला-एकीकृत शिक्षण को बढ़ावा देते हुए NEP 2020 के अनुरूप इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को थिएटर की मूल तकनीक, आवाज़ एवं शरीर-भाषा, कहानी-अभिनय, कक्षा-आधारित नाट्य गतिविधियों, छोटी नाट्य-कृति की रचना तथा समूह प्रस्तुति जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएंगे, जिन्हें वे कक्षा में छात्रों के साथ सीधे लागू कर सकेंगे। समापन दिवस पर प्रतिभागी समूह अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे और प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।
कार्यक्रम उद्घाटन सत्र के अवसर पर डायट के प्रवक्ता डॉ के एस रावत, डॉ संदीप कुमार जोशी, श्री के. पी. चंदोला, डॉ राजीव जोशी, डॉ सी. एम, जोशी, डॉ दीपा जोशी, डॉ उर्मिला बिष्ट, पूजा लोहुमी, रुचि पाठक, डॉ दयासागर आदि उपस्थित रहे।








