बागेश्वर। कपकोट क्षेत्र की लाहुर घाटी के हडबाड़ गांव में पिछले वर्ष आई आपदा से प्रभावित परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास की बाट जोह रहे हैं। इस बीच क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने जिला प्रशासन और सरकार पर आपदा पीड़ितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि एक साल बाद भी प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाया है।
पूर्व विधायक ने बताया कि पिछले वर्ष आई आपदा में चतुर सिंह के चार पुत्रों हरीश सिंह, जगदीश सिंह, गोपाल सिंह और पवन सिंह के आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे। भूगर्भीय सर्वेक्षण के बाद प्रशासन ने महज चार लाख रुपये की सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जबकि परिवारों ने कर्ज लेकर नए मकानों का निर्माण शुरू किया। अब दूसरी आपदा के बाद उनके निर्माणाधीन मकान भी खतरे की जद में आ गए हैं।
उन्होंने बताया कि पूरन राम पुत्र केशर राम, उनके बेटे और भतीजे का परिवार पिछले एक वर्ष से आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय में रहने को मजबूर है। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इन परिवारों के स्थायी विस्थापन को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है।
हडबाड़ गांव पहुंचे पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने ग्राम प्रधान मनोज होलरिया, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश सिंह हरड़िया, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोकुल परिहार, इन्द्र डसीला, नन्दन पांडे, पूर्व कैप्टन धाम सिंह गढ़िया, कुन्दन गोस्वामी, गैरी परिहार समेत अन्य लोगों के साथ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
इस दौरान फर्स्वाण ने कहा कि जिला प्रशासन और सरकार द्वारा कराई गई भूगर्भीय जांच पूरी तरह विफल साबित हुई है। जांच के नाम पर ग्रामीणों को गुमराह किया गया और आज स्थिति यह है कि प्रभावित परिवारों के नए निर्माणाधीन मकान भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से आपदा पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत, उचित मुआवजा और सुरक्षित स्थान पर स्थायी पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की।








