कपकोट, 9 अक्टूबर 2025।
राउमावि बैड़ा-मझेड़ा, ब्लॉक कपकोट (जिला बागेश्वर) में गुरुवार को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय ग्रामीणों को आपदाओं के प्रति जागरूक करना तथा बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में जिला आपदा प्रबंधन प्रशिक्षक श्री राजवीर सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने आपदाओं के प्रकार, उनके कारणों और उनसे निपटने के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि कपकोट हिमालय की तलहटी में स्थित है तथा यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से जोन-5 में आता है, जो अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यहाँ पर छोटे से छोटे झटके को भी गंभीरता से लेना आवश्यक है।

🌋 आपदा के चरणों की जानकारी
प्रशिक्षक ने विद्यार्थियों को आपदा से पहले, आपदा के दौरान, और आपदा के बाद अपनाई जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि घबराने की बजाय सजगता और संयम से काम लेना ही सबसे बड़ा बचाव है।
साथ ही उन्होंने आपदा की स्थिति में प्राथमिक उपचार (First Aid) के उपयोग और सामुदायिक सहयोग के महत्व पर भी बल दिया।
🌧️ स्थानीय घटनाओं से सीख
प्रशिक्षण में कपकोट क्षेत्र के पौसारी में बादल फटने और हड़बड़ा में भूस्खलन जैसी घटनाओं का उदाहरण देकर बताया गया कि किस प्रकार ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से पूर्व चेतावनी, सावधानी और सामूहिक प्रयास नुकसान को कम कर सकते हैं।
विद्यार्थियों को सिखाया गया कि बरसात के मौसम में भूस्खलन प्रवण क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें और नदियों या नालों के किनारे जाने से बचें।
🔥 आग लगने की स्थिति में सावधानियाँ
प्रशिक्षक ने विभिन्न प्रकार की आग और उन्हें बुझाने के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आग पाँच प्रकार की होती है —
A: ठोस पदार्थों की आग (जैसे लकड़ी, कपड़ा)
B: तरल पदार्थों की आग (जैसे पेट्रोल, डीज़ल)
C: गैस की आग (जैसे LPG, प्रोपेन)
D: विद्युत उपकरणों की आग (जैसे शॉर्ट सर्किट से लगी आग)
E: धातु की आग (जैसे मैग्नीशियम, सोडियम)
हर प्रकार की आग को बुझाने के लिए अलग-अलग विधियाँ अपनाने की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) के प्रयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया ताकि वे वास्तविक स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सकें।
⚡ अन्य आपदाओं पर जानकारी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान बिजली गिरने, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और सड़क दुर्घटनाओं जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई।
साथ ही विद्यार्थियों को यह भी सिखाया गया कि किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा नियंत्रण कक्ष (Disaster Control Room) से तुरंत संपर्क करें।
👨🏫 कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं समापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि “आपदा प्रबंधन की जानकारी हर विद्यार्थी तक पहुँचना आवश्यक है ताकि वे स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार और गाँव को भी सुरक्षित रख सकें।”
अंत में प्रशिक्षक ने सभी प्रतिभागियों को कहा कि आपदा के समय सजगता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।
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📸 कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने आपदा से बचाव के विभिन्न व्यावहारिक प्रदर्शन किए तथा प्रशिक्षकों से प्रश्न पूछकर जानकारी प्राप्त की।
विद्यालय के अन्य शिक्षक प्रकाश पाण्डे, राजेन्द्र धपोला, कन्हैया वर्मा और खिला कुमल्टा भी प्रशिक्षण मे उपस्थित रहे।








