हरिद्वार में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार द्वारा वर्ष 2027 में कुंभ मेले को “दिव्य और भव्य” रूप में आयोजित करने की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कुंभ एक पुण्यकाल है और इस अवसर पर अधिक से अधिक श्रद्धालुओं का आना तथा पुण्य लाभ अर्जित करना सर्वोत्तम नीति है। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं और समाज इस नीति का पालन करेंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि अखाड़ा परिषद और सरकार के बीच लंबे समय से संवाद और समन्वय होता रहा है, और दोनों मिलकर मेले की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि 2027 का कुंभ निश्चित रूप से दिव्य-भव्य होना चाहिए, लेकिन ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे सनातन धर्म की परंपराओं और मान्यताओं में बाधा आए।
विपक्ष, SIR और जनमुद्दे
विपक्ष द्वारा SIR को लेकर सवाल उठाए जाने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि विपक्ष का प्रश्न उठाना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसी आवाजें उठनी चाहिए जिन्हें जनता सुने। उन्होंने कहा कि यदि जनता के वास्तविक मुद्दों को उठाया जाएगा तो वे सुने जाएंगे; केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे उठाने से जनता का भरोसा नहीं बनता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि देश की जनता गौहत्या बंद चाहती है, तो उस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया जाता। सूचियों की जांच पर उन्होंने कहा कि समय-समय पर परीक्षण आवश्यक है; यदि कोई गलत व्यक्ति सूची में आ गया है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
‘जिहाद’ शब्द पर टिप्पणी
‘जिहाद’ शब्द से जुड़े प्रश्न पर शंकराचार्य ने कहा कि यह शब्द स्वभावतः विवाद और हंगामे से जुड़ा है। उनके अनुसार, किसी की इच्छा के विरुद्ध दबाव बनाकर धर्मांतरण कराना न तो देश की प्रकृति के अनुरूप है और न ही संविधान व कानून के। उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी प्रकार के ‘जिहाद’ को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और यह शब्द भारत के संदर्भ में उपयुक्त नहीं है।
शंकराचार्य ने अंत में पुनः दोहराया कि 2027 का कुंभ पारंपरिक मूल्यों और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करते हुए दिव्य और भव्य तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए।








