बागेश्वर: ग्राम पंचायत पगना/बेहरगांव में प्रस्तावित ट्रेंचिंग ग्राउंड के विरोध में ग्रामीणों ने 24 फरवरी को जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और सांकेतिक आमरण अनशन की घोषणा की है। इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीणों ने विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद बागेश्वर उनकी सहमति के बिना क्षेत्र में ट्रेंचिंग ग्राउंड निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि 15 फरवरी 2025 को धरना-प्रदर्शन की सूचना देने के बाद प्रशासन के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन अब तक कोई लिखित निर्णय नहीं मिला। 9 फरवरी 2026 को जेसीबी मशीन भेजकर निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास भी ग्रामीणों के विरोध के बाद रोकना पड़ा।
नदी, स्कूल और आबादी के पास प्रस्तावित स्थल
ग्रामीण सज्जन लाल टम्टा ने बताया कि प्रस्तावित स्थल से लगभग 50 मीटर नीचे सरयू-गोमती नदी बह रही है, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के नियमों के अनुसार ऐसी इकाइयों की दूरी कम से कम 200 मीटर होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, चयनित स्थल से प्राथमिक पाठशाला की दूरी लगभग 20 मीटर बताई गई है तथा करीब 50 परिवार 50 मीटर के दायरे में निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एनजीटी नियमावली के तहत स्कूल और आवासीय क्षेत्रों से भी पर्याप्त दूरी अनिवार्य है।
पेयजल स्रोत और गोचर भूमि का मुद्दा
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रस्तावित ट्रेंचिंग ग्राउंड से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पेयजल स्रोत (नौला) स्थित है, जो प्रभावित हो सकता है। साथ ही यह भूमि ग्रामीणों की गोचर (चरागाह) भूमि है, जहां पशुपालन और चारा व्यवस्था की जाती है।
रेलवे लाइन और पर्यावरणीय अनुमति पर सवाल
ज्ञापन में उल्लेख है कि चयनित स्थल के पास भारतीय उत्तर-पूर्व रेलवे की बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन का प्रस्तावित क्षेत्र है, जिसके अंतर्गत करीब 50 मीटर दूरी पर रेलवे पिलर स्थापित हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं एनजीटी से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया है, जो कि Solid Waste Management Rules 2016 के प्रावधानों के विपरीत है।
आंदोलन की चेतावनी
ट्रेंचिंग ग्राउंड विरोधी संघर्ष समिति, ग्राम पगना/बेहरगांव के बैनर तले ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थल चयन निरस्त नहीं किया गया तो 24 फरवरी को व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन पर क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।








