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36 लाख के गबन में डाकपाल को तीन साल की सजा, लाखों का अर्थदंड

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बागेश्वर। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी नाहर की अदालत ने सिमगड़ी शाखा डाकघर में लाखों रुपये के गबन और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी डाकपाल को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है।
सहायक लोक अभियोजन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2024 में डाक विभाग बागेश्वर को कमेड़ीदेवी क्षेत्र से सूचना मिली थी कि सिमगड़ी शाखा डाकघर में खाताधारकों के साथ वित्तीय अनियमितता और गबन किया गया है। सूचना के बाद तत्कालीन डाक अधीक्षक अल्मोड़ा राजेश कुमार बिनवाल ने मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की।
जांच में सामने आया कि शाखा डाकघर में करीब सात लाख रुपये की कमी पाई गई। इसके अलावा आरोपी ने 18 कूटरचित फर्जी पासबुक तैयार कर 59 खाताधारकों के साथ करीब 26 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी। बाद में अन्य खाताधारकों की शिकायतें मिलने पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसमें कुल 36 लाख रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया।
मामले में कांडा के तत्कालीन थानाध्यक्ष खुशवंत सिंह ने डाक विभाग और खाताधारकों की शिकायत के आधार पर आरोपी सुरेंद्र सिंह पंचपाल पुत्र स्व. गोवर्धन पंचपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान खाताधारकों, डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए तथा दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए। बाद में उप निरीक्षक कैलाश सिंह बिष्ट ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
करीब दो वर्ष तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया और 47 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
अदालत ने आरोपी को धारा 409 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और आठ हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 467 के तहत दो वर्ष के कारावास तथा धारा 471 के तहत एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि तीनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मामले की पैरवी सहायक लोक अभियोजन अधिकारी गौरव अग्रवाल और रश्मि कुलकोड़िया ने की। यह फैसला डाकघर में जमा धनराशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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