बागेश्वर : इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकाल अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह केवल एक संगठन का शताब्दी उत्सव नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सनातन परंपराओं के पुनर्स्थापन का प्रतीक है। इसी क्रम में दुग नाकूरी तूपेड़ में बलवंत सिंह खेतवाल के संचालन में इस वर्ष का विजयदशमी उत्सव विशेष रूप से ऐतिहासिक और भावनात्मक रहा। सरसंघचालक जी के निर्देशानुसार देशभर के प्रत्येक खंड में यह महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। उद्देश्य था — हर हिंदू वर्ग को जागरूक करना, घर-घर में सनातन की परंपराओं को सशक्त बनाना और हमारे समाज में व्याप्त कमियों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का सामूहिक संकल्प लेना।
मुझे अपने नगर में इस पावन कार्यक्रम के आयोजन का दायित्व सौंपा गया था। यह मेरे लिए गर्व और सौभाग्य की बात रही कि सभी स्वयंसेवक भाइयों ने व्यस्त समय के बावजूद तन-मन-धन से सहयोग दिया। सभी ने मिलकर एक ऐसे वातावरण का निर्माण किया, जहाँ सनातन के भाव, विचार और संस्कारों का सामूहिक संगम देखने को मिला।
हम सबने मिलकर यह संदेश दिया कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन का विज्ञान और समाज की आत्मा है। हमारे भीतर जो भी मतभेद या दुर्बलताएँ हैं, उन्हें दूर कर हमें एकता के सूत्र में बंधना है।
हमने यह संकल्प लिया कि समाज में व्याप्त बुराइयों, विभाजन और कुरीतियों को समाप्त करने के लिए हम सब एकजुट होकर कार्य करेंगे।
यह शताब्दी वर्ष केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य का आह्वान है —
कि हम सब मिलकर एक संगठित, सजग और सशक्त हिंदू समाज का निर्माण करें,
जहाँ सनातन की ज्योति प्रत्येक घर में, प्रत्येक हृदय में प्रज्वलित रहे।
मैं अपने सभी सहयोगी स्वयंसेवकों, भाइयों और नागरिकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाया।
जय श्रीराम! वंदे मातरम्! भारत माता की जय!








