बागेश्वर : महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर अल्मोड़ा जनपद के ताकुला क्षेत्र की सतराली होली आज बागनाथ मंदिर पहुंची। सात गांवों की यह पारंपरिक होली अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। पौराणिक परंपरा के अनुसार होल्यारों ने बाबा बागनाथ के धाम में शिव पूजा कर होली गीतों का गायन किया। जैसे ही शंभू तुम क्यों न खेलो होली लला गूंजा, पूरा मंदिर परिसर भक्ति और रंगों की उमंग में सराबोर हो उठा। मान्यता है कि सतराली के पूर्वजों ने बागनाथ मंदिर में धूणी का निर्माण कराया था। उसी परंपरा के चलते महाशिवरात्रि पर यहां पहली होली गाई जाती है। इसके बाद एकादशी को सातों गांवों में सात चीर बांधी जाती हैं और चतुर्दशी को ताकुला स्थित गणनाथ मंदिर में होली गायन की परंपरा निभाई जाती है। हर वर्ष की भांति इस बार भी सातों गांवों के लोग बाबा बागनाथ धाम से होली गायन का शुभारंभ करने पहुंचे। होल्यारों ने शिव आराधना के बाद अबीर गुलाल का तिलक लगाकर एक-दूसरे को महाशिवरात्रि और होली की शुभकामनाएं दीं। ग्रामीणों के अनुसार आजादी के बाद से ही उनके पूर्वज महाशिवरात्रि के दिन बाबा बागनाथ मंदिर में बैठकी होली का शुभारंभ करते आ रहे हैं। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी जीवित है। हालांकि करीब 40 साल से ज्यादा यह परंपरा बंद रही लेकिन 2017 से इसे दुबारा शुरू किया गया है। जिसे अब लगातार चलाया जाएगा।
वही होल्यार राजेश लोहनी ने बताया कि हमारे बुजुर्ग बताते थे कि होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि शिव भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। बाबा बागनाथ के दरबार से होली की शुरुआत करना हमारे लिए आस्था और गौरव दोनों है।
होल्यार हेम लोहनी ने बताया कि सतराली की होली हमारी पहचान है। हम लोग राग-रागिनियों के साथ शास्त्रीय शैली में बैठकर होली गाते हैं। यह परंपरा हमें अपने पूर्वजों से मिली है, जिसे हम सहेज कर आगे बढ़ा रहे हैं।
होल्यार वही महेश चंद्र ने बताया कि हमारे लिए यह केवल पर्व नहीं,बल्कि सांस्कृतिक साधना है। सतराली की होली में भक्ति, संगीत और लोक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
होल्यार वही पंकज ने बताया कि जब हम बाबा बागनाथ के मंदिर में होली गाते हैं तो लगता है जैसे पूरा क्षेत्र एक सूत्र में बंध गया हो। यही हमारी पौराणिक विरासत है, जिसे हम आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहते हैं।
महाशिवरात्रि पर सतराली की होली ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि कुमाऊं की लोक परंपराएं आज भी आस्था, संगीत और सामाजिक एकता का मजबूत आधार हैं।








