बागेश्वर। हरेला पर्व के अवसर पर जहां पूरे प्रदेश में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं सवाल संगठन ने पेड़ों की अंधाधुंध कटान पर चिंता जताते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बड़े पैमाने पर प्रस्तावित पेड़ कटान को पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया। संगठन के अध्यक्ष रमेश पांडेय कृषक ने कहा कि एक ओर शासन-प्रशासन हरेला पर्व के अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति से अपने घर और आंगन में पौधे लगाने की अपील कर रहा है, जबकि दूसरी ओर सरकार की देखरेख में हजारों पेड़ों की कटाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह दोहरी नीति समझ से परे है और इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े होते हैं।
प्रदर्शन के दौरान संगठन ने पोस्टरों के माध्यम से आरोप लगाया कि कांडा, उडियारीबैंड और रामेश्वर क्षेत्र में करीब 80 हजार पेड़ों की कटान प्रस्तावित है। संगठन ने पूछा कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर होने वाली पेड़ कटाई का जिम्मेदार कौन है और इसके लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई है। रमेश पांडेय ने कहा कि सरकार को विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना चाहिए। यदि बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जाती है तो इसका सीधा असर जल स्रोतों, जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित कटान पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और स्थानीय लोगों की राय लेने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पेड़ों की कटान के प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया तो संगठन जन आंदोलन छेड़ने को बाध्य होगा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “पेड़ बचाओ, पर्यावरण बचाओ” और “हरेला का संदेश, हरियाली का संरक्षण” जैसे नारे लगाकर सरकार से पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता दिखाने की मांग की।








