बागेश्वर। नव निर्वाचित अधिकतर ग्राम प्रधानों को मोहर व बस्ता नहीं मिल पाया है। इसके लिए वार्ड सदस्यों का मानक पूरा नहीं होना मुख्य वजह है। वार्ड सदस्य के चुनाव के लिए अभी तक आचार संहिता लागू नहीं होने पर ग्राम प्रधानों ने कड़ी आपत्ति जताई है। कहा कि यदि चुनाव आयोग ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो ग्राम प्रधान आंदोलन करेंगे और न्यायालय की भी शरण लेंगे। प्रधानों ने कहा कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो आचार संहिता लागू हुई है और न ही चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रधानों ने स्पष्ट कहा कि यदि 15 नवंबर 2025 तक पंचायत गठन संबंधी निर्णय नहीं लिया जाता है तो वे 20 नवंबर 2025 से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। जिला मुख्यालय के जिला पंचायत परिसर में आज सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में प्रधानों ने बताया कि पंचायतें भंग होने के बाद से ग्रामीण विकास पूरी तरह रुक गया है। मनरेगा, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, बिजली और सार्वजनिक निर्माण कार्यों पर ब्रेक लगा है। इससे प्रदेश में लगभग 80 लाख ग्रामीणों के जीवन पर असर पड़ा है। प्रधानों ने कहा कि सरकार की चुप्पी से जनता में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय पर कदम नहीं उठाया गया तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को भी मजबूर हो जाएंगे। अपनी मांगो में उन्होंने बची हुई पंचायतों में पंचायत चुनाव प्रक्रिया तत्काल शुरू कराने की मांग की। साथ ही प्रधानों ने कहा कि पंचायत शासन लोकतंत्र की नींव है। चुनाव में देरी से न केवल प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि जनता के मूलभूत अधिकार भी बाधित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत चुनाव कार्यक्रम घोषित करे।
प्रदेश में आचार संहिता शीघ्र लागू की जाए
प्रधानों का कहना है कि आचार संहिता लागू होने तक पंचायत गठन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने कहा कि सरकार चुनावी नौटंकी बंद कर ठोस कदम उठाए।
रुके विकास कार्य बिना देरी के शुरू कराए जाएँ
प्रधानों ने बताया कि ग्राम सभा स्वीकृत कार्य अधूरे पड़े हैं।
मनरेगा के तहत मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। पेयजल योजनाएँ बाधित हैं, ग्रामीणों को रोज़ाना सप्लाई की समस्या झेलनी पड़ रही है। कई पंचायत भवन और सामुदायिक भवन निर्माण कार्य बीच में रुके हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को पुनः शुरू करने के लिए सरकार तत्काल बजट और आदेश जारी करे।
विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों
प्रधानों ने मांग की कि ग्रामीण विकास विभाग, जल निगम, विद्युत निगम, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाए कि वे पंचायत चुनाव तक गांवों के कार्यों को न रोकें।
15 नवंबर तक निर्णय नहीं तो होगा बृहद आंदोलन
उन्होंने कहा कि सरकार कार्रवाई नहीं करती तो 20 नवंबर से पंचायत प्रतिनिधि शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरेंगे। यह आंदोलन प्रदेशभर में किया जाएगा।
आवश्यक हुआ तो न्यायालय की शरण
प्रधानों ने कहा कि जनहित की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
सरकार चुप रही तो प्रधान न्यायालय में PIL दाखिल कर न्याय मांगेंगे।








