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गुलदार–भालू की बढ़ी गतिविधियों को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर लाइटें लगाएगा वन विभाग

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बागेश्वर। शीतकालीन मौसम में जनपद बागेश्वर के विभिन्न क्षेत्रों में गुलदार एवं भालू जैसे वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए बागेश्वर वन प्रभाग द्वारा ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत संवेदनशील एवं गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में सोलर लाइटों का वितरण व स्थापना की जा रही है।

वन प्रभाग द्वारा मण्डलसेरा, शीशाखानी, हरसीला, रैथल, भनार, चन्तोला, वज्यूला, छटिया, खोली, मेलाडुंगरी, लाहुरबरमती एवं सोराग सहित कुल 30 संवेदनशील क्षेत्रों का चयन किया गया है, जहां सोलर लाइटें लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। इन क्षेत्रों में पूर्व में वन्यजीवों की आवाजाही एवं घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

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इसके साथ ही वन विभाग द्वारा वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता एवं निगरानी कार्य भी तेज कर दिए गए हैं। ग्राम सभाओं, गोष्ठियों, रैलियों एवं जागरूकता शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को सुरक्षा एवं सतर्कता उपायों की जानकारी दी जा रही है।

वन विभाग ने मेलाडुंगरी, असों, मजकोट एवं भेटा सहित अन्य प्रभावित ग्रामों में ट्रैप कैमरे, फॉक्स लाइट तथा एनाइडर मशीनें स्थापित की हैं। साथ ही वन क्षेत्रों से सटे गांवों में झाड़ी कटान कार्य भी कराया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों के छिपने के स्थान कम किए जा सकें।

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प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्न ने बताया कि विभाग द्वारा विगत वर्षों में हुई वन्यजीव घटनाओं एवं वर्तमान में प्राप्त शिकायतों का गहन अध्ययन कर हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में सोलर लाइटों की स्थापना के साथ-साथ फॉक्स लाइट, ड्रोन एवं एनाइडर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए मानव–वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग ने क्षेत्रवासियों से सतर्कता बरतने की अपील करते हुए समूह में आवाजाही करने, अपने साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था रखने, तथा चलते समय हल्का शोर करने जैसे सुझाव दिए हैं, जिससे वन्यजीवों को मानव उपस्थिति का आभास हो सके। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा न फैलाने एवं अनावश्यक रूप से घने वन क्षेत्रों में प्रवेश न करने की भी अपील की गई है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निरंतर गश्त की जा रही है तथा नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वन्यजीवों की आवाजाही दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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