नवनियुक्त डीएम के आते ही जिला प्रशासन का सेंसर फरमान जनसुनवाई की वीडियोग्राफी पर रोक
सूचना अधिकारी के आदेश से पत्रकारों में आक्रोश, नाकामियां छिपाने का आरोप
बागेश्वर। जिले में नवनियुक्त डीएम अपूर्वा पांडेय के कार्यभार संभालते ही जिला प्रशासन का एक नया और चर्चाओं से भरा रुख सामने आया है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रशासनिक कमियों और जनता की समस्याओं को मीडिया की सुर्खियों में आने से रोकने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा रास्ता निकाला है। सूचना अधिकारी की ओर से जारी एक आधिकारिक नोट में जिले के सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधियों से विनम्र अनुरोध किया गया है कि वे जनसुनवाई में उपस्थित होने वाले फरियादियों और शिकायतकर्ताओं की वीडियोग्राफी करने से पूरी तरह परहेज करें। गोपनीयता और प्राइवेसी की आड़ में जारी किए गए इस नए नियम के तहत अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को जनसुनवाई के लिए आवश्यक वीडियो फुटेज और विजुअल्स सूचना विभाग से ही समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका सीधा और साफ मतलब यह निकाला जा रहा है कि अब मीडिया के कैमरों को जनता की बुनियादी समस्याओं, टूटती सड़कों, पानी की किल्लत और दफ्तरों के चक्कर काटते लाचार फरियादियों को सीधे दिखाने की अनुमति नहीं होगी।
प्रशासनिक फिल्टर से छनकर सामने आएगी विकास की तस्वीर
चुनावी साल में जिला प्रशासन के इस कदम को सीधे तौर पर अपनी नाकामियों और व्यवस्था की बदहाली पर पर्दा डालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सूचना अधिकारी की ओर से जारी इस आदेश के बाद अब पत्रकारों को जिला प्रशासन के केवल वही सकारात्मक और चमकते कार्य दिखाने होंगे, जिन्हें सूचना विभाग खुद अपने कैमरों से रिकॉर्ड करके और फिल्टर करके मीडिया को बांटेगा। नवनियुक्त डीएम के आते ही जारी हुए इस शाही फरमान पर जिले के स्वतंत्र पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों का साफ कहना है कि जनसुनवाई जैसी सार्वजनिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए, न कि पाबंदियां। गोपनीयता का हवाला देकर वास्तव में जनता की आवाज को दबाने और चुनावी माहौल में सरकार-प्रशासन के खिलाफ उठने वाली जायज शिकायतों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। वही पूर्व विधायक कपकोट ललित फर्स्वाण ने इसे आम आदमी और पत्रकारों को जनता की समस्याओं से दूर करने का फरमान बताया। उन्होंने कहा कि यह तुगलकी फरमान है। साफ तौर पर सरकार जिला प्रशासन के माध्यम से पत्रकारों को लोगो की समस्याओं से दूर करना चाहती है। गोपनीयता का जो हवाला दिया जा रहा है वो साफ तौर पर अपनी नाकामी छिपाने की मुख्य वजह है।








