गणितीय भय दूर करने और विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि पैदा करने पर रहा जोर, तीनों ब्लॉकों के शिक्षकों ने किया प्रतिभाग
बागेश्वर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बागेश्वर में आयोजित चार दिवसीय जिला संदर्भ समूह-गणित के गठन एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में जनपद के तीनों विकासखंडों के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान शिक्षकों को गणित के नवाचारी, प्रयोगात्मक और आधुनिक शिक्षण तरीकों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. बीडी पांडेय ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गणित विषय में नवाचार के साथ शिक्षण करने वाले शिक्षकों, स्वयं सहायता समूहों, समाजसेवियों और अभिभावकों को चिन्हित करना है। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों, विद्यालयों और संस्थाओं के कार्यों को जनसामान्य तक पहुंचाना है, ताकि उनके प्रयास अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में गणित के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित करना और गणितीय भय (मैथ फोबिया) को दूर करना भी कार्यशाला के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रहा।
डायट की प्राचार्या कमलेश्वरी मेहता ने तीनों विकासखंडों से आए शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यशाला में सीखे गए गणितीय ज्ञान और शिक्षण विधियों का उपयोग शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों को लगातार नए प्रयोग और नवाचार अपनाने होंगे।
चार दिवसीय कार्यशाला में एमबीपीजी कॉलेज के गणित विभाग के प्रो. नरेंद्र कुमार सिंह सिजवाली, दून स्कूल देहरादून के गणित विभागाध्यक्ष चंदन सिंह घुघतियाल, एनसीईआरटी के प्रो. अनूप कुमार राजपूत, एनसीईआरटी के पूर्व प्रोफेसर धर्म प्रकाश तथा खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त डॉ. प्रकाश चंद्र फुलारा ने संदर्भदाता के रूप में विभिन्न सत्रों में प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण सत्रों में संख्या पद्धति, बीजगणित, अभाज्य संख्याओं, एलसीएम-एचसीएफ, बहुपद, द्विघात समीकरण, ज्यामिति, त्रिकोणमिति और पाइथागोरस प्रमेय जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा बाइनरी ऑपरेशन, फंक्शन, लॉगरिदमिक फंक्शन, ग्राफ, कंपोजिट फंक्शन और त्रिकोणमितीय फलनों की जानकारी भी दी गई।
दून स्कूल के गणित विभागाध्यक्ष चंदन सिंह घुघतियाल ने दक्षता आधारित प्रश्नों (Competency-Based Questions), 5C, RAG Analysis और Competency-Based Education के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. प्रकाश चंद्र फुलारा ने द्विविमीय एवं त्रिविमीय आकृतियों, स्थानिक समझ और बीजगणित एवं ज्यामिति के समन्वय से शिक्षण की जानकारी दी।
प्रो. अनूप कुमार राजपूत ने रचनावादी शिक्षण पद्धति, 5E Instructional Model, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-2023) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी दी। वहीं प्रो. धर्म प्रकाश ने सम एवं विषम संख्याओं, साइबर सुरक्षा, डाटा हैंडलिंग, भिन्नों के शिक्षण, यूक्लिडीय ज्यामिति और त्रिकोणमिति के व्यावहारिक उपयोगों पर चर्चा की।
समापन सत्र में कार्यशाला की समीक्षा की गई। इस अवसर पर डायट के सदस्य डॉ. केपी चंदोला, डॉ. संदीप जोशी, डॉ. राजीव जोशी सहित डायट के संकाय सदस्य, संदर्भदाता और विभिन्न विकासखंडों से आए शिक्षक उपस्थित रहे।







