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बागेश्वर में वनाग्नि पर ड्रोन की नजर,आग लगाने वालों पर वन विभाग की सख्ती, 8 संदिग्ध चिन्हित

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बागेश्वर। जनपद में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और वन संपदा की सुरक्षा के लिए वन विभाग बागेश्वर ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रोन कैमरों से निगरानी शुरू कर दी है। संवेदनशील वन क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस के माध्यम से आग लगाने अथवा आग फैलाने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अब तक विभाग ने आठ संदिग्ध व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग के अनुसार, वनाग्नि की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण और दोषियों की पहचान के उद्देश्य से संवेदनशील क्षेत्रों में दिन-रात निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। ड्रोन कैमरों की सहायता से न केवल आग लगने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है, बल्कि आग लगने के कारणों और संलिप्त लोगों की पहचान भी की जा रही है।

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घिरोली, गोगिनापानी और कौसानी क्षेत्र में संदिग्ध चिन्हित

विभागीय जानकारी के अनुसार, बागेश्वर वन क्षेत्र के घिरोली और गोगिनापानी क्षेत्र में चार संदिग्ध व्यक्तियों को चिन्हित किया गया है, जबकि बैजनाथ वन क्षेत्र के अंतर्गत कौसानी क्षेत्र में भी चार लोगों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं। कुल आठ व्यक्तियों को नोटिस जारी करते हुए भारतीय वन अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग का कहना है कि जिन क्षेत्रों में लगातार वनाग्नि की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। विभागीय टीमें नियमित गश्त के साथ ड्रोन सर्विलांस के जरिए हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।

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वनाग्नि से पर्यावरण और वन्यजीवों को खतरा

वन विभाग ने कहा कि वनाग्नि से बहुमूल्य वन संपदा, जैव विविधता, वन्यजीवों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा आग लगने से जल स्रोत, वनस्पति और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित होता है, जिसका असर आम जनजीवन पर पड़ता है।

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जनता से सहयोग की अपील

वन विभाग ने जनपदवासियों से अपील की है कि वन क्षेत्रों में आग न लगाएं और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें। यदि कहीं भी वनाग्नि या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम वन कार्यालय या विभागीय अधिकारियों को दें। वन विभाग ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।” विभाग ने जनसहभागिता के माध्यम से जंगलों को सुरक्षित और संरक्षित रखने में सहयोग की अपेक्षा की है।

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