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सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव में सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर हुआ मंथन

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एआई से उत्तराखंड के विकास को मिल सकती है नई गति: रवीन्द्र नाथ पाठक

बागेश्वर। उत्तराखंड के सतत विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका और संभावनाओं पर चर्चा के लिए यूकॉस्ट की ओर से आयोजित पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव में विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें मंत्रम संस्था की ओर से रवीन्द्र नाथ पाठक ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन उत्तराखंड’ विषय पर विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई का प्रभावी उपयोग राज्य के विकास को गति देने में सहायक हो सकता है।

सत्र के दौरान रवीन्द्र नाथ पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है। तकनीक के सहयोग से विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग सहायक तकनीक के रूप में किया जाना चाहिए, न कि इसे हर समस्या का समाधान मान लेना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षकों, अभिभावकों और समाज से जो प्रत्यक्ष अनुभव, संस्कार और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करते हैं, उनका विशेष महत्व है। एआई जानकारी जुटाने और कार्यों को आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन मानवीय अनुभव, विवेक और मार्गदर्शन को सर्वोपरि रखना जरूरी है। तकनीक का उपयोग सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

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आपदा प्रबंधन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक एआई की संभावनाएं

कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रम संस्था के अध्यक्ष मधुसूदन जोशी ने कहा कि भविष्य में एआई का उपयोग उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन, उन्नत कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजागरूकता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड में आपदा संबंधी चुनौतियों के समाधान, किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने में आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि इन विषयों पर जागरूकता बढ़ाने और एआई के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए मंत्रम संस्था की ओर से भविष्य में समय-समय पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को नई तकनीक की संभावनाओं तथा उसके जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

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वैज्ञानिक सोच और तकनीकी जागरूकता पर जोर

पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव के अंतर्गत आयोजित इस सत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग, सतत विकास और उत्तराखंड की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत, डॉ. नवीन जोशी, डॉ. ब्रजेश आगरी, डॉ. रावत और डॉ. रौतेला सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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