बागेश्वर। जिला कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष भगवत सिंह डसीला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बागेश्वर दौरे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बागेश्वर पहुंचकर जनसमस्याएं दूर करने का भरोसा जरूर दिया, लेकिन यदि वे इंडोर स्टेडियम से मात्र पचास कदम और आगे बढ़ जाते, तो उन्हें वहां खड़े सैकड़ों असहाय परिवारों की रोज़ी-रोटी की असली तस्वीर दिखाई देती।
डसीला ने कहा कि उक्त स्थान पर करीब 50 से अधिक डंपर व अन्य वाहन सीज कर खड़े हैं, जिन पर आश्रित परिवार आज भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थानीय विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि इस दिशा में आंखें मूंदे बैठे हैं, जबकि कम से कम मुख्यमंत्री को इन पीड़ितों की व्यथा सुननी चाहिए थी।
उन्होंने बताया कि एक वर्ष से अधिक समय से खड़े रहने के कारण इन वाहनों की बॉडी जंग खा चुकी है, बैटरियों के सेल खराब हो चुके हैं, टायरों का रबर गल गया है और बैंक में जमा धनराशि गाड़ियों की किश्त चुकाने में समाप्त हो चुकी है। हालत यह है कि बच्चों की फीस समय पर जमा नहीं हो पा रही, राशन की दुकानों से राशन बंद हो गया है, उधार देने वालों ने फोन उठाना बंद कर दिया है और बैंकों द्वारा नोटिस भेजे जाने लगे हैं।
डसीला ने भावुक होते हुए कहा कि त्योहार मनाना इन परिवारों के लिए सपना बन चुका है। दीपावली पर जब बच्चे नए कपड़े, मिठाई और पटाखों की मांग करते हैं, तो मजबूर पिता दिलासा देकर उन्हें चुप कराते हैं। एक असहाय बाप की लाचारी यह है कि वह सिर्फ “कुछ दिन और इंतजार” करने को कह सकता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर इन पीड़ित परिवारों का यह आपातकाल कब समाप्त होगा। डसीला ने सुझाव दिया कि यदि इच्छा हो तो उत्तर प्रदेश की तर्ज पर इन वाहनों के चालान माफ किए जा सकते हैं और दर्ज मुकदमों को राज्यपाल के माध्यम से वापस लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाकी निर्णय पूरी तरह सरकार की इच्छा पर निर्भर है।








