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बागेश्वर: तीसरी संतान का तथ्य छिपाना पड़ा भारी, जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम अयोग्य घोषित

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बागेश्वर जिले की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04 असों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम को तीन जीवित जैविक संतानें होने के मामले में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी आर.सी. तिवारी ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी किए।

मामला उस समय चर्चा में आया जब निर्वर्तमान कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवत सिंह डसीला ने उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम की धारा-90(1)(द) का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुन्दन राम ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान अपनी तीसरी जीवित संतान संबंधी तथ्य छिपाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायतीराज निदेशालय के निर्देश पर जांच शुरू की गई।

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सीडीओ द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति में परियोजना निदेशक, जिला पंचायतराज अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी, बागेश्वर को शामिल किया गया। जांच के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पोषण ट्रैकर एप, टीकाकरण अभिलेख, टेक होम राशन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।

जांच में 06 सितंबर 2025 के पंजीकृत गोदनामे में स्वयं कुन्दन राम द्वारा तीन जीवित जैविक संतानें होने का उल्लेख पाया गया। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के रिकॉर्ड में भी तीसरी संतान के जन्म और पोषण संबंधी विवरण दर्ज मिले। जांच समिति के समक्ष कुन्दन राम ने भी लिखित रूप से तीसरी संतान होने की पुष्टि की।

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उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा-90(1)(द) के अनुसार दो से अधिक जीवित जैविक संतान वाले व्यक्ति को जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य माना गया है। उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विहित प्राधिकारी ने कुन्दन राम को पद हेतु अयोग्य घोषित किया है।

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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्णय से पूर्व संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया तथा सभी अभिलेखों का विधिसम्मत परीक्षण किया गया। आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष को 15 दिनों के भीतर कुमाऊं मंडलायुक्त के समक्ष अपील करने का अधिकार प्राप्त है। वहीं अब जिले में दो जगह नाम दर्ज होने वाले अन्य सदस्यों पर संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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