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70 वर्षीय बुजुर्ग को तीन किमी कंधों पर ढोकर पहुंचाया सड़क तक, पेसिया गांव की तस्वीर ने खोली विकास की पोल

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घर के आंगन में गिरकर घायल हुए बुजुर्ग, सड़क न होने से ग्रामीणों ने दुर्गम रास्तों से पहुंचाया अस्पताल

कपकोट:
कपकोट क्षेत्र के दूरस्थ पेसिया गांव में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग के घायल होने के बाद ग्रामीणों को उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए करीब तीन किलोमीटर तक कंधों के सहारे दुर्गम रास्तों से गुजरना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ के गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत को उजागर कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, पेसिया गांव निवासी 70 वर्षीय नारायणदत्त पांडे अपने घर के आंगन में अचानक फिसलकर गिर गए। हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उपचार के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन गांव तक सड़क सुविधा नहीं होने से उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। बाद में जांच में उनके पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।

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ग्रामीण मदद के लिए आगे आए और अस्थायी सहारे के जरिए घायल बुजुर्ग को कंधों पर उठाकर कठिन, पथरीले और जंगल से होकर गुजरने वाले पैदल रास्ते से करीब तीन किलोमीटर दूर विजयपुर रणकांडा तक पहुंचाया। वहां से वाहन की व्यवस्था कर उन्हें उपचार के लिए हल्द्वानी भेजा गया।

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ग्रामीणों का कहना है कि पेसिया गांव तक पहुंचने वाला रास्ता बेहद कठिन और जोखिम भरा है। बरसात के दिनों में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। ऐसे में किसी मरीज, गर्भवती महिला या बुजुर्ग के बीमार पड़ने पर हालात और गंभीर हो जाते हैं।

ग्रामीण भास्करानंद पांडे, हरीश चंद्र और सुरेश पांडे ने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी कई पहाड़ी गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सड़क न होने से लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि विकास के दावों के बीच पहाड़ के गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।

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