कांडा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत खातीगांव–देवतोली–नरगोली–चंतोला मोटर मार्ग पर भैंसखाल गधेरे में 27 जून को कल्मट टूटने के बाद भी विभाग अब तक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं कर पाया है। इससे सीमांत क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने विभाग पर खानापूर्ति और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। मार्ग पर दलदल और धंसान की स्थिति बनी हुई है, जिससे हल्के वाहन भी नहीं गुजर पा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग की कार्यशैली से निराश ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर दोपहिया वाहनों के लिए अस्थायी रास्ता तैयार किया, लेकिन यह रास्ता भी बेहद जोखिम भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि हल्की सी चूक कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
सड़क बंद होने का असर अब जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। नरगोली, ठांगा और चंतोला ग्राम सभाओं की तीन सस्ता गल्ला दुकानों तक खाद्यान्न नहीं पहुंच पाया है। वहीं पिछले 56 दिनों से घरेलू गैस सिलेंडर वितरण वाहन भी क्षेत्र तक नहीं पहुंच सके हैं, जिससे लोगों के सामने रसोई गैस का संकट गहरा गया है।
जिला पंचायत सदस्य सरोज आर्या, सस्ता गल्ला विक्रेता पूरन भौर्याल, अनिल रौतेला, राजेंद्र राम, मनमोहन सिंह, पूरन चंद्र सहित तीनों ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुरक्षित और स्थायी वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया गया और क्षतिग्रस्त कल्मट का पुनर्निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि सीमांत क्षेत्र की लगातार अनदेखी की जा रही है और लोगों की समस्याओं के समाधान के प्रति विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
इस संबंध में पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता उमेश कुमार ने बताया कि भैंसखाल में दो जेसीबी मशीनें ऑपरेटरों सहित भेज दी गई हैं। मार्ग निर्माण का कार्य प्रगति पर है और प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही हल्के वाहनों के आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार कर दिया जाए।








