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भौतिक विज्ञान विभाग की अनूठी पहल, 100 चाल–खालों से होगा 30 हजार लीटर जल संचयन

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वन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और जनसहभागिता से वज्यूला विद्यालय में शुरू होगा अभियान, पहले चरण में बनेंगी 100 चाल–खाल

बागेश्वर। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और लगातार घटते प्राकृतिक जलस्रोतों के बीच अटल उत्कृष्ट पदम सिंह परिहार राजकीय इंटर कॉलेज, वज्यूला के भौतिक विज्ञान विभाग ने जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में एक अभिनव पहल शुरू की है। विद्यालय द्वारा ‘जल संजीवनी चाल–खाल अभियान’ प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके तहत प्रथम चरण में विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में 100 चाल–खाल बनाई जाएंगी।
भौतिक विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि यदि वर्षाजल को छोटे-छोटे चाल–खालों के माध्यम से भूमि में समाहित किया जाए तो भूजल पुनर्भरण, सूखते नौलों और धारों के संरक्षण तथा प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। विभाग के अनुसार, एक मीटर लंबी, एक मीटर चौड़ी और लगभग एक फुट गहरी एक चाल–खाल में करीब 305 लीटर वर्षाजल एक बार में भूमि में समाहित हो सकता है। इस आधार पर 100 चाल–खालों में एक बार भरने पर करीब 30,500 लीटर वर्षाजल का संरक्षण और भूजल पुनर्भरण संभव होगा। वर्षा ऋतु में इनके बार-बार भरने से यह मात्रा कई गुना बढ़ सकती है। अभियान की खास बात यह है कि इसका संचालन वन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, विद्यालय प्रशासन के संरक्षण और जनसहभागिता से किया जाएगा। अभियान में भारतीय रेड क्रॉस समिति, जूनियर रेड क्रॉस, राष्ट्रीय सेवा योजना, विद्यालय परिवार, छात्र-छात्राओं और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। गडखेत रेंज के रेंजर प्रदीप कांडपाल ने कहा कि जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। केवल सरकारी प्रयासों से यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। जनसहभागिता और श्रमदान से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य दीपक आर्य ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। यह अभियान विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करेगा। अभियान के मुख्य सूत्रधार एवं प्रवक्ता भौतिक विज्ञान आलोक पांडे ने बताया कि यह पहल विज्ञान को समाजहित में व्यवहारिक रूप देने का प्रयास है। हमारा उद्देश्य केवल वर्षाजल को रोकना नहीं, बल्कि उसे भूमि में समाहित कर भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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