बागेश्वर। आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री संगठन, उत्तराखंड के बैनर तले आशा कार्यकत्रियों ने मंगलवार को रैली निकालकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से भेजा गया।
प्रदर्शनकारी आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि वे वर्षों से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। टीकाकरण, प्रसव, जनसंख्या नियंत्रण, पोषण अभियान और टीबी उन्मूलन जैसे कार्यक्रमों में उनकी अहम भूमिका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही सम्मानजनक वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा।
संगठन ने मांग की कि आशा कार्यकत्रियों को राज्य कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। इसके अलावा सेवानिवृत्ति पर पांच लाख रुपये, सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि, नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था तथा योग्य आशा कार्यकत्रियों को एएनएम पदों पर समायोजित किए जाने की मांग उठाई गई।
आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशाओं को उनका हक और सम्मान मिलना चाहिए। चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।








