बागेश्वर।
जिले के दूरस्थ चनबोडी से सिमतोली साता प्यारा क्षेत्र का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है, जिसने पहाड़ों में विकास के दावों की जमीनी सच्चाई उजागर कर दी है। वीडियो में ग्रामीण बीमार व्यक्ति को डोली के सहारे ऊबड़-खाबड़ रास्तों से कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि आज भी इस पूरे क्षेत्र में मोटरमार्ग की सुविधा नहीं है, जिसके चलते आपात स्थिति में लोगों को जान जोखिम में डालकर मरीजों को ढोना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात और सर्दियों के दौरान हालात और भी भयावह हो जाते हैं। कच्चे और फिसलन भरे रास्तों पर मरीज को डोली में ले जाना किसी परीक्षा से कम नहीं होता। कई बार समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मामलों में रास्ते में ही मरीजों ने दम तोड़ दिया, जिससे पूरे गांव में आक्रोश है।
ग्रामीण बताते हैं कि सड़क निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है। इसके लिए कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, धरना-प्रदर्शन किए गए और यहां तक कि आमरण अनशन भी किया गया। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका। ग्राम प्रधान सरिता देवी, दरवान सिंह मेहता और आनंद सिंह मेहता सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। उनका कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को आज भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्थिति और भी कठिन है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो गांव में पुनः आंदोलन और आमरण अनशन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक विकास के दावे खोखले ही साबित होंगे। यह वीडियो एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है और सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को डोली के सहारे जिंदगी ढोनी पड़ेगी।








