logo

रंगदारी और धमकी के आरोपित को सत्र न्यायालय से राहत नहीं

खबर शेयर करें -

बागेश्वर। रंगदारी मांगने, धमकी देने और धनराशि हड़पने के आरोप में आरोपित गोपाल चंद्र बनवासी को सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने उसकी फौजदारी निगरानी खारिज करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट गरुड़ की ओर से 11 फरवरी 2026 को पारित आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा है।

मामले के अनुसार, सिटोली निवासी मंगल सिंह ने 19 सितंबर 2025 को बैजनाथ थाने में गोपाल बनवासी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दुकान निर्माण को लेकर की गई शिकायत वापस लेने के नाम पर पहले 10 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद मदद के नाम पर दो लाख रुपये लिए गए।

यह भी पढ़ें 👉  देवतोली इंटर कॉलेज की समस्याओं को लेकर जिला कार्यालय में प्रदर्शन

आरोप है कि दुकान से उधार में सामान लेने और रकम वापस मांगने पर शिकायतकर्ता को मुकदमे में फंसाने, दुकान निर्माण की शिकायत करने और जान से मारने की धमकी दी गई। साथ ही पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने का भी आरोप लगाया गया।

यह भी पढ़ें 👉  ग्रामीण विद्यार्थियों को मिली डिजिटल उड़ान* राजकीय इंटर कॉलेज खुनौली में कंप्यूटर लैब का शुभारंभ

विवेचना के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2), 308(4) और 316(2) के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट गरुड़ ने 11 फरवरी 2026 को आरोप तय किए थे। इसके खिलाफ गोपाल चंद्र बनवासी ने सत्र न्यायालय में निगरानी दायर कर आरोप निरस्त करने की मांग की थी।

सत्र न्यायाधीश ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर न्यायालय को मामले का लघु विचारण नहीं करना होता, बल्कि यह देखना होता है कि अभियोजन के आरोपों के आधार पर प्रथम दृष्टया विचारण के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं। अदालत ने अभिलेखों में शिकायतकर्ता की ओर से अलग-अलग तिथियों में धनराशि दिए जाने तथा आरोपित के खाते में दो लाख रुपये जाने से संबंधित साक्ष्यों को प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण माना।

यह भी पढ़ें 👉  प्रभारी प्रधानाचार्य धर्म सिंह के समर्थन में उतरा शिक्षक संघ

इन आधारों पर अदालत ने आरोप तय करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए गोपाल चंद्र बनवासी की फौजदारी निगरानी खारिज कर दी।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad
Share on whatsapp