बागेश्वर: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आगाज हो गया है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विभिन्न विषयों को समेकित रूप से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य के अनुरूप कला शिक्षण के द्वारा सरल और बोधगम्य बनाने के नवाचारों पर सेमिनार में शोधकर्ताओं द्वारा विमर्श किया जाएगा।
मुख्य अतिथि सीसीआरटी नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. गिरीश चंद्र जोशी. विशिष्ट अतिथि डॉ. एस पी सेमवाल . मुख्य वक्ता गुजरात एससीईआरटी से डॉ. वैशाली एवं एस सी ई आर टी देहरादून के डॉ. संजीव चेतन रहे। मुख्य अतिथि डॉ जी सी जोशी ने कहा कि शिक्षा स्वंय कला है. कला जीवन जीने की शैली है। उन्होंने कहा कि बागेश्वर में राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा में कला की मुख्य भूमिका पर जो विमर्श किया जा रहा है वह राष्ट्रीय चिंतन का विषय बनेगा। डॉ. सेमवावल ने कहा कि कला मानव की जन्मजात और आवश्यक आवश्कता है। बिना कला की शिक्षा की परिकल्पना सम्भव नहीं है। मुख्य व्यक्त देते हुए डॉ वैशाली ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण द्वारा कला के विभिन्न पक्षों की जानकारी दी। डॉ संजीव चेतन ने शिक्षा की नीति और वर्तमान व्यवस्था में कला शिक्षा हासिये पर जा रही है जो बहुत बड़ी चिंता बताया। सेमिनार में विभिन्न राज्यों और जनपदों से 30 से अधिक शोधकर्ताओं द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं. एक सौ से अधिक शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरीश जोशी, डॉ. रुचि पाठक ने सेमिनार के उद्देश्य और रुपरेखा प्रस्तुत की। प्राचार्य चक्षुपति अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत करते किया। डायट के अकादमिक गतिविधियों का उल्लेख किया। संचालन डॉ. राजीव जोशी ने किया। सेमिनार में राजस्थान से प्रधानाचार्य डॉ राजेन्द्र कुमार निर्मल, अजय शर्मा, देहरादून से संजीव चेतन दिल्ली से जी सी जोशी, नैनीताल से डॉ डि एन भट्ट, डायट चम्पावत से डॉ. दिनेश खेतवाल,डॉ. कमल गहतोड़ी, भिकियासेंण से कृपाल सिंह शीला, पिथौरागढ ज्योति जोशी पंकज शाह, कृष्ण अवतार पांडे, मेघा, रघुवंश रावत, प्रियंका प्रीत, रूपा, डॉ. केएन कांडपालl, बलवंत कालाकोटीi, लक्ष्मी मेहरा,डॉ.अंजू परिहार, दीपिका जोशी सहित डायट फैकल्टी, प्रशासनिक अधिकारी आदि उपस्थित रहे। राष्ट्रीय संगोष्ठी में जनपद के माध्यमिक में बोर्ड परीक्षा के चार टॉपर विद्यार्थियों सुमन नेगी, शुभम पांडे, खुशी आर्या और मेघा को सम्मानित भी किया।
इस दौरान कार्यक्रम संयोजक डॉ हरीश जोशी और डॉ रुचि पाठक ने कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य एनईपी 2020 के अनुरूप कला-समेकित शिक्षण को व्यवहारिक रूप में लागू करना है। कला के माध्यम से विषयों को जोड़ने से विद्यार्थियों की समझ और रचनात्मकता में वृद्धि होती है। हमें आशा है कि यहां से प्राप्त अनुभव शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। वही प्राचार्य चक्षुपति अवस्थी ने कहा कि डायट बागेश्वर सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देता रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां शिक्षकों को नई सोच और नई दिशा प्रदान करती हैं। यह हमारे संस्थान के लिए गौरव की बात है कि देशभर के शिक्षाविद यहां एकत्रित हुए हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश चंद्र जोशी ने कहा कि कला शिक्षा केवल एक विषय नहीं, बल्कि सीखने की एक प्रभावी प्रक्रिया है। एनईपी 2020 में इसे विशेष महत्व दिया गया है। कला-समेकित अधिगम से विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित होता है, जो भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.पी. सेमवाल ने कहा कि आज के समय में शिक्षा को रोचक, सरल और जीवनोपयोगी बनाना आवश्यक है। कला-समेकित शिक्षण इस दिशा में एक मजबूत माध्यम है। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों को अपने शिक्षण कौशल को निखारने का अवसर मिलता है।
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शोध पत्रों के विषय..
. कला शिक्षा एक समेकित विषय.
. विज्ञान शिक्षण में कला.
. सामाजिक अध्ययन में कला की उपयोगिता.
. भाषा में कला के कौशल.
. गणित शिक्षण में कला की भूमिका.
. भारतीय नाट्य कला और विषयों का शिक्षण.
. समाज में कला.








