कांडा के सामुदायिक संसाधन केंद्र में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने लगाया जागरूकता शिविर, निःशुल्क कानूनी सहायता सहित विभिन्न योजनाओं की दी जानकारी
बागेश्वर, 9 अक्टूबर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बागेश्वर की ओर से कांडा स्थित सामुदायिक संसाधन केंद्र में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के साथ ही विभिन्न कानूनी अधिकारों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रिटेनर अधिवक्ता महिप किशोर ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैले भ्रम और झिझक को दूर करना जरूरी है। लोगों को मानसिक समस्याओं के प्रति जागरूक करने के साथ ही उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिंदगी, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, नींद की कमी, कार्य और निजी जीवन के बीच संतुलन का अभाव तथा अकेलापन युवाओं और कामकाजी लोगों में मानसिक तनाव बढ़ने के प्रमुख कारण बन रहे हैं। मानसिक समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि तनाव, अवसाद और चिंता का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। लंबे समय तक तनाव बने रहने से उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्याओं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कानूनी अधिकारों और योजनाओं की दी जानकारी
शिविर के दौरान लोगों को साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी तथा नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। इसके साथ ही नालसा जागृति योजना, नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100, स्थायी लोक अदालत की भूमिका और निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी गई।
अधिवक्ता ने पॉक्सो अधिनियम, दहेज प्रथा के दुष्परिणाम, बाल विवाह की रोकथाम तथा सामुदायिक मध्यस्थता के महत्व पर भी प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त नालसा वीर परिवार सहायता योजना, 2025 और मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों को न्याय एवं मुआवजा उपलब्ध कराने से संबंधित नालसा योजना, 2025 के बारे में जानकारी देकर लोगों को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
शिविर का उद्देश्य आम नागरिकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाने के साथ-साथ कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना रहा, ताकि जरूरतमंद लोग समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।







