पहाड़पानी (नैनीताल)। नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत दीनी तल्ली में शुक्रवार सुबह एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई। तोक धुरा क्षेत्र निवासी हेमा देवी (35) पत्नी गोपाल सिंह को तेंदुआ उनके घर के समीप से ही झपट कर जंगल की ओर ले गया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत और ग्रामीणों की खोजबीन के बाद महिला का क्षत-विक्षत शव घर से पांच किलोमीटर दूर जंगल में बरामद हुआ। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत और वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
देवर की आंखों के सामने खींच ले गया ‘गुलदार’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह हेमा देवी अन्य दिनों की तरह मवेशियों के लिए चारा लेने जंगल की ओर जा रही थीं। घर से कुछ ही दूरी पर घात लगाकर बैठे तेंदुए ने अचानक उन पर हमला कर दिया। पास ही मौजूद उनके देवर ने जब तेंदुए को भाभी पर हमला करते देखा, तो उन्होंने शोर मचाते हुए पत्थरों से तेंदुए को भगाने का प्रयास किया। लेकिन आदमखोर हो चुका तेंदुआ महिला को घसीटते हुए घने जंगलों की ओर ले गया।
डेढ़ घंटे बाद मिला शव, ग्रामीणों में उबाल
घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ जंगल की ओर दौड़े। करीब डेढ़ घंटे के गहन सर्च अभियान के बाद घर से 5 किमी दूर हेमा का शव लहूलुहान हालत में मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई थी, जिसकी सूचना कई बार वन विभाग को दी गई, लेकिन विभाग की लापरवाही ने आज एक महिला की जान ले ली। नथुवाखान के वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट ने बताया कि टीम मौके पर भेज दी गई है और उचित कार्रवाई की जा रही है।
चिंता का विषय: पहाड़ में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष अब एक विकराल रूप ले चुका है। आए दिन हो रही ये घटनाएं कुछ गंभीर सवाल खड़े करती हैं:
आवासीय बस्तियों तक पहुंच: जंगलों में भोजन और पानी की कमी के कारण हिंसक जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। धारी की यह घटना प्रमाण है कि तेंदुआ अब घर के दरवाजों तक दस्तक देने लगा है।
पलायन और असुरक्षा: ऐसी घटनाओं के कारण पहाड़ के लोग अपने ही घरों और खेतों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जो अंततः गांवों से पलायन का एक बड़ा कारण बन रहा है
वन विभाग की कार्यप्रणाली: ग्रामीणों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई न करना (जैसे गश्त बढ़ाना या पिंजरा लगाना) विभाग की विफलता को दर्शाता है।
निष्कर्ष: सरकार और प्रशासन को केवल मुआवजे तक सीमित न रहकर, संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग, नियमित गश्त और वन्यजीवों के व्यवहार के अध्ययन पर ठोस नीति बनानी होगी, ताकि फिर किसी ‘हेमा’ को अपनी जान न गंवानी पड़े।








