logo

रोड नहीं तो वोट नहीं, सुमगढ़ के ग्रामीणों ने बनाई सड़क संघर्ष समिति

खबर शेयर करें -

बागेश्वर। सड़क, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्राम पंचायत सुमगढ़ के ग्रामीणों ने अब सड़क की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। शुक्रवार को ग्राम प्रधान भूपेंद्र कोरंगा की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामीणों की बैठक में सड़क संघर्ष समिति का गठन किया गया। ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है।
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क सुविधा का अभाव है। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को आवागमन के साथ ही बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाएं जुटाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य और दूरसंचार व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई। सड़क की मांग को लेकर गठित संघर्ष समिति का अध्यक्ष ग्राम प्रधान भूपेंद्र कोरंगा को तथा जिला पंचायत सदस्य नीमा गड़िया को संरक्षक बनाया गया। समिति में मंगल सिंह रावत, विजय सिंह धींगा, महिपाल सिंह कोरंगा, गणेश दत्त जोशी, जोगा राम, उपप्रधान कला देवी, प्रेमा रावत, आनंदी देवी, हरीश चंद्र आर्य, कान्ति बल्लभ और मोहन सिंह सहित ग्रामीणों को सदस्य बनाया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से राजमिस्त्री की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

नेताओं के गांव में प्रवेश पर भी रोक की चेतावनी
ग्रामीणों ने एकमत होकर कहा कि यदि विधानसभा चुनाव से पहले गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। साथ ही सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गांव में प्रवेश नहीं करने देने की चेतावनी दी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। अब वे सड़क निर्माण की ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

यह भी पढ़ें 👉  बागेश्वर में कल 5 अगस्त को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र रहेंगे बंद, जिला प्रशासन ने जारी किया आदेश

डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन

ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि सड़क संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा। इसके बाद भी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि सड़क उनके लिए सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी मूलभूत जरूरत है।
ग्रामीणों का संदेश साफ है—“सड़क नहीं तो वोट नहीं।”

Share on whatsapp