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बंद होने की कगार से फिर गुलजार हुआ गोलना का प्राथमिक विद्यालय, ग्रामीणों के प्रयास से लौटी रौनक

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कपकोट (बागेश्वर)। जनपद बागेश्वर के कपकोट तहसील अंतर्गत गोलना गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय, जो छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गया था, अब एक बार फिर बच्चों की किलकारियों से गूंज उठा है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास ने इस विद्यालय को नया जीवन दे दिया है।
बीते चार वर्षों तक यह विद्यालय महज एक छात्रा के भरोसे संचालित होता रहा। जैसे ही इस वर्ष वह छात्रा कक्षा 5 उत्तीर्ण कर आगे बढ़ी, विद्यालय पूरी तरह छात्रविहीन हो गया और स्कूल पर ताला लगने की स्थिति बन गई थी।
हालांकि इस संकट की घड़ी में गांव ने हार नहीं मानी। ग्राम प्रधान ज्योति शाही, सामाजिक कार्यकर्ता कमल शाही और क्षेत्र के अभिभावकों ने मिलकर संकल्प लिया कि गांव का स्कूल बंद नहीं होने देंगे। शिक्षा के महत्व को समझते हुए उन्होंने अपने बच्चों का नामांकन इसी विद्यालय में कराना शुरू किया।
इस सामूहिक पहल का सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आया। जहां कुछ समय पहले तक स्कूल में सन्नाटा पसरा था, वहीं अब 10 बच्चों के नामांकन से विद्यालय में फिर से चहल-पहल लौट आई है। इतना ही नहीं, आने वाले समय में 5 और बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे विद्यालय और मजबूत होने की उम्मीद है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मुनि गढ़िया ने इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह उदाहरण समाज की एकजुटता और शिक्षा के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को नजदीकी सरकारी विद्यालयों में भेजकर शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में योगदान दें।
गोलना गांव की यह पहल न केवल एक विद्यालय के पुनर्जीवन की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि समाज संगठित होकर प्रयास करे, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है। यह कहानी अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जहां सरकारी स्कूल छात्र संख्या के अभाव में बंद होने की कगार पर हैं।

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