बागेश्वर : जिले की कपकोट तहसील का सुमगढ़ गाँव अब भी सड़क सुविधा से जुड़ नहीं पाया है। सड़क न होने के कारण आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को डोली के सहारे कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
बीमारों के लिए डोली ही एम्बुलेंस
ग्राम प्रधान भगवत सिंह कोरंगा ने बताया कि सड़क मार्ग न होने से गंभीर बीमारों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए कई किलोमीटर लंबा, पथरीला और खड़ी चढ़ाई वाला मार्ग पार करना पड़ता है। कई घटनाओं में मरीज इलाज तक नहीं पहुँच पाए और उनकी जान चली गई। गाँव की सैकड़ों की आबादी अब भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। डोली के सहारे मरीजों को ले जाना सुमगढ़ की रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है। आज मालती देवी जिनका स्वास्थ्य खराब था को ग्रामीण 4 किमी का सफर कार डोली के सहारे गांव तक ले गए। और ये हर रोज का हाल है। जिस कारण हमे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विकास के दावों पर प्रश्नचिन्ह
सड़क निर्माण की मांग वर्षों से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। चुनावों के दौरान सड़क निर्माण के वादे किए जाते रहे हैं, मगर स्थिति ज्यों-की-त्यों बनी हुई है। गाँव में यह विश्वास तेजी से गहराता जा रहा है कि पहाड़ के इस हिस्से तक विकास की पहुँच अभी भी अधूरी है।
2010 की आपदा की दर्दनाक यादें आज भी ताज़ा
सुमगढ़ उसी क्षेत्र में स्थित है जहाँ वर्ष 2010 में बादल फटने की गंभीर घटना हुई थी, जिसमें कई स्कूली बच्चे मलबे में दब गए थे। उस समय राहत और बचाव कार्य में भी सड़क न होने के कारण बड़ी कठिनाइयाँ सामने आई थीं। आपदा के इतने वर्षों बाद भी गाँव तक सड़क न पहुँच पाने से भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जोखिम बना हुआ है।
सड़क निर्माण की माँग फिर जोर पकड़ रही है
मरीजों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और सामान्य जीवन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुमगढ़ में सड़क निर्माण की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। क्षेत्र पंचायत सदस्य मंगल रावत ने बताया कि इतने सालों से सुमगढ़ गांव सड़क से विहीन है। हम लगातार इसको लेकर जनप्रतिनिधियो और जिला प्रशासन को अवगत करा रहे है लेकिन आज भी हालात जस के तस है।








