बागेश्वर। राज्य सरकार की ओर से उपजिला चिकित्सालय का दर्जा दिए जाने के बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट इन दिनों बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। तीन पट्टी दानपुर के मुख्य अस्पताल में डॉक्टरों के लगातार स्थानांतरण के चलते कई ओपीडी कक्षों में ताले लटक रहे हैं। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल पा रही है।
अस्पताल की स्थिति ऐसी हो गई है कि ग्रामीण इसे स्वास्थ्य केंद्र के बजाय ‘रेफर सेंटर’ के रूप में देखने लगे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ और दंत चिकित्सक के कक्ष लंबे समय से बंद पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। हैरत की बात यह है कि सीएचसी कपकोट स्थानीय विधायक कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के खिलाफ उत्तराखंड क्रांति दल ने मोर्चा खोलते हुए सीएचसी कपकोट की प्रभारी डॉ. अनुभा को ज्ञापन सौंपा। यूकेडी के केंद्रीय संयुक्त मंत्री एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी करम सिंह दानू ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग उठाई।
दानू ने कहा कि कपकोट में जो भी डॉक्टर तैनात होता है, वह कुछ समय बाद अपना तबादला करवाकर चला जाता है। इससे साफ है कि अस्पताल में चिकित्सकों को रोकने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावी व्यवस्था नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी के कारण दानपुर घाटी के लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ढुलमुल नीतियों का खामियाजा ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ रहा है। सरकार ने अस्पताल को उपजिला चिकित्सालय का दर्जा तो दे दिया, लेकिन उसके अनुरूप चिकित्सकों और विशेषज्ञ सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने सरकार से अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वालों में भीम सिंह कोरंगा, दलीप राम, मोहन सिंह दानू और गंगा राम समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।






