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गरुड़ में रेशम कृषकों की जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित,उन्नत तकनीकों की दी जानकारी

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गरुड़ (बागेश्वर)। केंद्रीय रेशम बोर्ड के ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ राष्ट्रीय वृहद रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान के तहत गरुड़ में जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य रेशम कृषकों को उन्नत तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनकी क्षेत्रीय समस्याओं का तकनीकी समाधान उपलब्ध कराना रहा। बैठक में वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और कृषकों के बीच सीधा संवाद हुआ। 30 से अधिक रेशम कृषकों ने प्रतिभाग किया।
पी-3 मूल बीज फार्म माजरा देहरादून के वैज्ञानिक-सी डॉ. विक्रम कुमार ने कृषकों को गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज के उपयोग, वैज्ञानिक पालन तकनीक, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन, पालन गृह के विसंक्रमण तथा स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन की जानकारी दी। उन्होंने कृषकों द्वारा उठाई गई व्यावहारिक समस्याओं के तकनीकी समाधान भी बताए।
क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र सहसपुर देहरादून के वैज्ञानिक-डी डॉ. पवन सैनी ने ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषकों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के साथ शहतूत बागानों के बेहतर प्रबंधन और रेशमकीट पालन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया, जिससे कोकून उत्पादन और कृषकों की आय में वृद्धि हो सके।
पर्यावरणविद् किशन सिंह मलड़ा ने पर्वतीय क्षेत्रों में रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए शहतूती रेशम के साथ मूगा रेशम उत्पादन को भी बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर रेशम उत्पादन में विविधीकरण किया जा सकता है, जिससे कृषकों के लिए आय के अतिरिक्त साधन विकसित होंगे।
सहायक विकास अधिकारी गरुड़ मनीषा, जिला रेशम निरीक्षक ब्रजेश रतूड़ी तथा रेशम फार्म गरुड़ की डेमोंस्ट्रेटर एवं प्रभारी डॉ. स्नेहा जोशी ने कृषकों को शहतूत पौधरोपण, बागान प्रबंधन, रेशमकीट पालन और विभागीय योजनाओं एवं सहयोग की जानकारी दी।
बैठक में कृषकों ने रेशम उत्पादन से जुड़ी अपनी समस्याएं और सुझाव विशेषज्ञों के समक्ष रखे। अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई। बैठक के माध्यम से कृषकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर रेशम उत्पादन को अधिक वैज्ञानिक, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी बनाने पर जोर दिया गया।

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