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नाले की बदहाली से खतरे में बेसहारा महिला का मकान, वर्षों से लगा रही गुहार

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कपकोट। नगर पंचायत कपकोट के वार्ड संख्या-6 जाजर में प्रशासनिक उदासीनता का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां रहने वाली सुनीता देवी, पत्नी स्वर्गीय ललित कुमार, अपने आवासीय मकान को बचाने के लिए लंबे समय से विभागों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

राष्ट्रीय राजमार्ग 109के से सटे सुनीता देवी के मकान के सामने से गुजरने वाले नाले की निकासी लंबे समय से बाधित है। वर्तमान में इस मार्ग और नाले के रखरखाव की जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास है। पीड़िता का कहना है कि नाले की सफाई नहीं होने के कारण घर के आगे लगातार गंदा पानी जमा रहता है, जिससे उनके मकान को खतरा पैदा हो गया है।

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सुनीता देवी ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जब यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन थी, तब भी जलभराव की समस्या के कारण उनके आंगन की सुरक्षा दीवार ढह गई थी और मकान में दरारें पड़ गई थीं। उस समय विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने अपनी सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद निजी खर्च से दीवार का पुनर्निर्माण कराया।

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अब एक बार फिर नाले की निकासी बंद होने से जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे नई सुरक्षा दीवार पर भी खतरा मंडरा रहा है। वहीं, घर के आसपास जमा दूषित पानी के कारण मच्छर और मक्खियों की संख्या बढ़ गई है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बनी हुई है।

पति के निधन के बाद अकेले संघर्ष कर रही सुनीता देवी का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते नाले की सफाई और निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो उनके मकान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

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इस संबंध में सीमा सड़क संगठन के प्रभारी जी.एस. खाती ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है और जल्द ही श्रमिकों की टीम भेजकर नाले की सफाई तथा निकासी बहाल करने की कार्रवाई की जाएगी।

अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि विभाग अपने आश्वासन को कितनी जल्दी धरातल पर उतारता है। फिलहाल एक बेसहारा महिला अपने आशियाने को बचाने की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रही है।

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