सरपंच संगठन ने उठाए 10 मुद्दे, वन्यजीवों से सुरक्षा, फसल मुआवजा और वन पंचायतों के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की मांग
बागेश्वर। वन पंचायतों के सामने आ रही समस्याओं के समाधान और सरपंचों को प्रोत्साहन देने की मांग को लेकर सरपंच संगठन बागेश्वर ने आवाज उठाई है। संगठन के अध्यक्ष एवं बिजोरी वन पंचायत के सरपंच दीपक पांडे (रुद्रा) ने शासन-प्रशासन के समक्ष 10 प्रमुख मांगें रखते हुए इनके समाधान के लिए 10 विभागीय कार्य दिवस का समय देने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं होने पर सरपंच संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
दीपक पांडे ने कहा कि वन पंचायतों के सरपंच वनाग्नि से जंगलों को बचाने, अवैध कटान और वन तस्करी जैसी गतिविधियों पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए कोई मासिक मानदेय नहीं मिलता। उन्होंने सरपंचों को 5000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की मांग उठाई। उनका कहना है कि मानदेय मिलने से सरपंचों को प्रोत्साहन मिलेगा और वन संरक्षण के कार्यों को मजबूती मिलेगी।
वन पंचायतों के विकास के लिए अलग निधि की मांग
संगठन ने कहा कि बजट के अभाव में वन पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे इनकी गतिविधियां कमजोर पड़ रही हैं। प्रत्येक वन पंचायत को त्रैमासिक या छमाही आधार पर विकास कार्यों के लिए सुरक्षित वन विकास निधि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही, जिन वन पंचायतों के माइक्रोप्लान तैयार नहीं हुए हैं, उन्हें बजट उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई। संगठन ने निजी संस्थाओं की महंगी फीस के बजाय विभागीय टीम गठित कर माइक्रोप्लान तैयार कराने का सुझाव भी दिया।
वन्यजीवों से सुरक्षा और फसल नुकसान का मुआवजा मिले
वन पंचायत क्षेत्रों में भालू, जंगली सूअर और गुलदार के बढ़ते आतंक को लेकर भी चिंता जताई गई। संगठन के अनुसार, वन्यजीवों के हमलों और नुकसान के भय से ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन की समस्या गंभीर हो रही है। इससे बचाव के लिए वन पंचायतों की सीमाओं पर छह फीट ऊंची तारबाड़ लगाने, गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गश्त टीम गठित करने और संवेदनशील गांवों में नियमित गश्त कराने की मांग की गई।
इसके अलावा भालू और जंगली सूअरों से फसलों को हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई। संगठन ने मुआवजा प्रक्रिया को सरल बनाते हुए तीन से पांच दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने और वन्यजीवों से प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता देने के लिए विशेष टीम गठित करने का प्रस्ताव रखा। मांग के अनुसार, यह टीम सूचना मिलने के एक घंटे के भीतर पीड़ित तक पहुंचे।
इको टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर
संगठन ने बागेश्वर की वन पंचायतों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने और पर्यटन की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पंचायतों को विशेष बजट उपलब्ध कराने की मांग की। दीपक पांडे का कहना है कि इससे स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को पहचान मिलेगी तथा ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, जिससे पलायन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
सीमांकन और बजट संबंधी समस्याएं दूर करने की मांग
वन पंचायतों की सीमाएं स्पष्ट नहीं होने से अतिक्रमण और भूमि विवाद बढ़ने का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन ने राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम से वन पंचायतों का पुनर्सीमांकन और पक्की पैमाइश कराने की मांग की है।
इसके साथ ही, वन विभाग के अधिकारियों, वन पंचायत सचिवों और सरपंचों के बीच बजट निकासी में आ रही परेशानियों को दूर करने तथा संबंधित वन पंचायतों की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि वन पंचायतों के संरक्षण, विकास और प्रभावी संचालन के लिए विभागीय स्तर पर समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरी है।
दीपक पांडे ने कहा कि वन पंचायतें जंगलों के संरक्षण के साथ ग्रामीण जीवन और पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए सरपंचों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सभी मांगों पर 10 विभागीय कार्य दिवस के भीतर कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी है।







