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बागेश्वर में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, 10 शिक्षकों की सेवा समाप्त

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दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई, अन्य मामलों की जांच भी जारी; नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल

बागेश्वर। जिले में शिक्षा विभाग ने दस्तावेजों की जांच में अनियमितता पाए जाने पर विभिन्न राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 10 शिक्षक-शिक्षिकाओं की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। विभागीय कार्रवाई के बाद अब नियुक्ति के समय अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। विभाग का कहना है कि अन्य मामलों की जांच भी जारी है।

शिक्षा विभाग के अधिकारी आशा राम चौधरी ने बताया कि जांच के दौरान जिन 10 शिक्षक-शिक्षिकाओं के दस्तावेज आदि गलत पाए गए, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि अन्य मामलों की भी जांच चल रही है और जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

इन शिक्षकों की सेवा समाप्त

विभागीय कार्रवाई के अनुसार सेवा समाप्त किए गए शिक्षक-शिक्षिकाओं और उनके विद्यालयों की सूची इस प्रकार है—

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– ममता देवी — राजकीय प्राथमिक विद्यालय ससौला, कांडा
– चन्द्र प्रकाश आर्य — राजकीय प्राथमिक विद्यालय रीमा क्वीटी, कपकोट
– रजनी — राजकीय प्राथमिक विद्यालय उछात
– लक्ष्मी आर्य — राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यालडूँगा, कपकोट
– रोहित कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय चनौस चनूसी, कपकोट
– नेहा — राजकीय प्राथमिक विद्यालय नरगोली, कांडा
– संजय कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय ठेली, कपकोट
– अरविन्द कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय जलमानी, कपकोट
– पंकज कुमार — राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुन्दिल, बागेश्वर
– प्रियंका — राजकीय प्राथमिक विद्यालय उडियारी जगथाना, कपकोट

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

दस शिक्षकों की सेवा समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर उठ रहा है। यदि संबंधित अभिलेखों में ऐसी अनियमितता थी, जिसके आधार पर बाद में सेवाएं समाप्त करनी पड़ीं, तो नियुक्ति के समय उनका सत्यापन किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया था, यह भी जांच का विषय बन गया है।

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हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में पूरे प्रकरण में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया और संबंधित स्तरों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर असर की चिंता

जिले के कई ग्रामीण विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी और सीमित संसाधनों की चुनौती से जूझ रहे हैं। ऐसे में लंबे समय तक विद्यालयों में शिक्षण कार्य करने के बाद शिक्षकों की सेवाएं समाप्त होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।

अब शिक्षा विभाग के सामने यह चुनौती होगी कि संबंधित विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को कैसे पूरा किया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर भी है कि विभाग प्रभावित विद्यालयों में वैकल्पिक शिक्षकों की क्या व्यवस्था करता है।

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अन्य मामलों की जांच जारी

दस शिक्षकों की सेवा समाप्ति के बाद विभाग द्वारा अन्य नियुक्तियों और अभिलेखों की जांच जारी रहने की बात कही गई है। यदि जांच का दायरा बढ़ता है तो आने वाले दिनों में और मामलों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल इस कार्रवाई ने जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब देखना होगा कि विभागीय जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया संबंधी लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी कैसे तय की जाती है।

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