उत्तरकाशी। बड़कोट स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी में अंग्रेजी भाषा शिक्षण को सरल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड के सभी जनपदों से आए प्रतिभागियों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
इस संगोष्ठी में जनपद बागेश्वर का प्रतिनिधित्व प्रियंका प्रीत, सहायक अध्यापिका, राउमावि मलसूना तथा डॉ. संजय कुमार टम्टा, प्रधानाध्यापक, राप्रावि झिरौली द्वारा किया गया। दोनों शिक्षकों ने “21वीं शताब्दी में प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी भाषा सीखने के कौशल” विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत कर सार्थक विचार साझा किए।
शोध पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शिक्षा को रटने की प्रवृत्ति से हटाकर समझ आधारित एवं कौशल उन्मुख बनाने पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थी भाषा को बेहतर ढंग से सीख सकेंगे और भविष्य में रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे।
प्रियंका प्रीत ने कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक भाषा शिक्षण पद्धतियों पर पुनर्विचार आवश्यक है। भाषा शिक्षण को स्थानीय परिवेश से जोड़ते हुए राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए।
डॉ. संजय कुमार टम्टा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कौशल विकास पर दिए गए विशेष जोर को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि जब विश्व कौशल आधारित शिक्षा की ओर अग्रसर है, तब भारतीय शिक्षा प्रणाली को रोजगार से जोड़ना अत्यंत जरूरी हो गया है, जिससे शिक्षा जीवनोपयोगी एवं समाजोपयोगी बन सके।








