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मानवाधिकार संरक्षण व सुशासन पर जागरूकता कार्यक्रम, 40 लोगों ने सौंपे परिवाद

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बागेश्वर: उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बागेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में विकास भवन सभागार बागेश्वर में दो दिवसीय मानवाधिकार संरक्षण एवं सुशासन के संवेदनीकरण पर परिवादों की सुनवाई एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दूसरे दिन मानवाधिकार, विधिक अधिकारों और विभिन्न सामाजिक विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का संचालन शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गोविन्द बल्लभ उपाध्याय ने किया। इस दौरान उपस्थित लोगों को बाल विवाह, नालसा डॉन योजना सहित विभिन्न विधिक प्रावधानों की जानकारी दी गई। जागरूकता शिविर में रिटेनर अधिवक्ता त्रिलोक चन्द्र जोशी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की गतिविधियों, धारा-12 के तहत निःशुल्क कानूनी सहायता, नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100, तथा देवभूमि में बुजुर्गों का मान अभियान के तहत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की जानकारी दी। वहीं लीगल एड डिफेंस काउंसल बागेश्वर के असिस्टेंट हेम चन्द्र सिंह राणा ने नालसा की विभिन्न योजनाओं एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता कुमारी ने घरेलू हिंसा अधिनियम, बाल विवाह, दहेज प्रथा, मानवाधिकार, मूल अधिकार, बाल श्रम, जेजे एक्ट, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम-2013, पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट तथा महिला पीड़ितों/उत्तरजीवियों के लिए नालसा मुआवजा योजना-2020 पर विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग देहरादून के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने जलवायु परिवर्तन से मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव, जंगलों में आग की घटनाएं तथा मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम-1993 के संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण और सुशासन के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दूसरे दिन करीब 40 लोगों की समस्याओं से संबंधित आवेदन भी प्राप्त किए गए, जिनके निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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