बागेश्वर। ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को नया आयाम देने की दिशा में बागनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। पुरातत्व विभाग की देखरेख में बन रहा यह संग्रहालय दिसम्बर तक तैयार होने की संभावना है। इसके बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंदिर परिसर में संरक्षित दुर्लभ प्रतिमाओं का विधिवत दर्शन करने का अवसर मिलेगा।
बागनाथ मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में चंद वंशीय राजाओं ने कराया था। यहां स्थित बाणेश्वर, कालभैरव समेत अनेक प्राचीन मंदिर अपनी भव्य नक्काशी, स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था के कारण विशेष महत्व रखते हैं। वर्तमान में मंदिर परिसर के एक कक्ष में पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित 69 प्राचीन प्रतिमाएं रखी गई हैं, जिनमें उमा-महेश्वर, गणेश, विष्णु, महिषासुरमर्दिनी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की दुर्लभ मूर्तियां शामिल हैं। इन मूर्तियों का कालखंड 8वीं से लेकर 18वीं सदी के बीच का माना जाता है। स्थान और उचित संरक्षण के अभाव में वर्षों से ये अनमोल विरासत एक बंद कक्ष में धूल से भरी पड़ी है। कई मूर्तियों पर मकड़ी के जाल तक लगे हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इन धरोहरों का संरक्षण नहीं किया गया तो इन अनूठी प्रतिमाओं को सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा। स्थानीय जनमानस व पुरातत्व प्रेमियों की मांग पर यहां आधुनिक संग्रहालय का निर्माण शुरू किया गया है। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और पूरा होने के बाद सभी प्रतिमाओं को सुरक्षित रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही कालभैरव मंदिर सहित अन्य स्थानों पर संरक्षित 12 अतिरिक्त मूर्तियों को भी संग्रहालय में रखा जाएगा। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी अल्मोड़ा चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि विभाग मूर्तियों के संरक्षण को लेकर पूरी तरह गंभीर है। बागनाथ मंदिर परिसर में बन रहा यह संग्रहालय नए वर्ष की शुरुआत तक श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए खोलने का लक्ष्य है। संग्रहालय तैयार होने पर सभी प्रतिमाओं को व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे लोग हमारे समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि संग्रहालय के निर्माण से बागेश्वर पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाएगा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।








