बागेश्वर : देवभूमि उत्तराखंड में विगत 27 वर्षों से निरंतर संचालित हो रही विश्वनाथ-जगदीशिला डोली यात्रा इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ प्रदेश भ्रमण पर निकली हुई है। यह यात्रा उत्तराखंड के विभिन्न प्रमुख देवालयों का भ्रमण करते हुए धार्मिक एकता, विश्व शांति और उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के प्रचार-प्रसार का संदेश दे रही है।
विश्वनाथ-जगदीशिला डोली यात्रा का मुख्य उद्देश्य चारधाम यात्रा के अतिरिक्त उन प्राचीन, ऐतिहासिक और सिद्धपीठ स्वरूप देवालयों को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करना है, जो वर्षों से उपेक्षित रहे हैं। यात्रा के माध्यम से न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया जा रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन और स्वरोजगार की संभावनाओं को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। आज यात्रा की शुरुआत कोट भ्रामरी मंदिर से हुई। दिन में बाबा बागनाथ धाम में यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। यात्रा के तहत बाबा बागनाथ में पूजा अर्चना के बाद यात्रा कांडा की और प्रस्थान कर गई है। बता दे कि हरिद्वार से प्रारंभ हुई यह पवित्र यात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों और प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर रही है। बागेश्वर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने डोली का भव्य स्वागत किया। विश्वनाथ – जगदीशिला धार्मिक पर्यटन यात्रा के संयोजक एवं उत्तराखंड सरकार के पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उसी आध्यात्मिक धरोहर को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिससे समाज में आपसी भाईचारा और सभी धर्मों के बीच सौहार्द की भावना मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अनेक सिद्धपीठ, प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जिनका ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत समृद्ध है। यदि इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन से जोड़ा जाए तो स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं, जिससे पलायन की समस्या को भी कम किया जा सकेगा। इस दौरान पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी,पूर्व दर्जा राज्यमंत्री राजेंद्र टंगड़िया, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गीता रावल,भगत रावल, अर्जुन भट्ट, किरन पांडे, संजय रावल, राजेंद्र परिहार आदि मौजूद रहे।








