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पहले से सड़क सुविधा होने का हवाला देकर ग्रामीणों ने रुकवाया निर्माण, 15 दिन तक थमा रहेगा काम

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कांडा। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत कांडा-धपोलासेरा-सानीउडयार मोटर मार्ग से टिटौली होते हुए पालीबग्याली और चिफलेत तक प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर जेसीबी रुकवा दी और सड़क निर्माण कार्य बंद करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव पहले से ही मोटर मार्ग से जुड़े हैं। ऐसे में नई सड़क के निर्माण से उनकी कृषि भूमि और खेत-खलिहान प्रभावित हो रहे हैं।
टिटौली से पालीबग्याली तक सड़क निर्माण कार्य दो सितंबर को शुरू हुआ था। चार सितंबर को भी ग्रामीणों ने निर्माण का विरोध किया था, जिसके बाद कुछ दिनों के लिए काम रोक दिया गया था। गुरुवार को निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने पर पालीबग्याली की ग्राम प्रधान पूनम चंदोला के नेतृत्व में पालीबग्याली और चिफलेत के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जेसीबी रोककर निर्माण कार्य बंद करने की मांग की।
मामले की सूचना मिलने पर ग्रामीण निर्माण विभाग की सहायक अभियंता यामिनी खनायत और अपर सहायक अभियंता दान सिंह बिष्ट मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि सड़क का निर्माण जबरन नहीं किया जा रहा है, बल्कि पूर्व में तत्कालीन ग्राम प्रधान और ग्रामीणों की मांग एवं सहमति के आधार पर सड़क स्वीकृत हुई है। सड़क बनने से टिटौली, देलमेल, तोली, पालीचैक-बग्याली और चिफलेत क्षेत्र के ग्रामीणों को सड़क सुविधा मिलने की बात अधिकारियों ने कही।
सहायक अभियंता यामिनी खनायत ने बताया कि करीब चार करोड़ रुपये की लागत से 1.7 किलोमीटर सड़क और एक पुलिया का निर्माण प्रस्तावित है। ग्रामीणों ने अपनी खेती और घास आदि समेटने के लिए 15 दिन का समय मांगा। इसके बाद लिखित सहमति के आधार पर अगले 15 दिनों तक निर्माण कार्य रोकने पर सहमति बनी है।
पहले से सड़क से जुड़ा है गांव, नई सड़क की जरूरत नहीं: प्रधान
ग्राम प्रधान पूनम चंदोला ने कहा कि पालीबग्याली गांव पहले से ही मोटर मार्ग से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों की जमीन पहले भी विभिन्न विकास कार्यों में कट चुकी है। इसके अलावा खड़िया खनन के कारण भी क्षेत्र का काफी भूभाग प्रभावित हुआ है। अब प्रस्तावित सड़क निर्माण से ग्रामीणों की खेती-किसानी की जमीन भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इस सड़क निर्माण के पक्ष में नहीं हैं।
प्रधान ने यह भी सवाल उठाया कि सड़क निर्माण से प्रभावित ग्रामीणों से अनापत्ति प्रमाणपत्र और सहमति लिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन जिन ग्रामीणों की भूमि प्रभावित हो रही है, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों की स्थिति को देखते हुए निर्माण पर पुनर्विचार की मांग की।
निर्माण कार्य का विरोध करने वालों में राजन सिंह कर्म्याल, बलवंत कर्म्याल, कमलेश चंदोला, नवीन भट्ट, नंदाबल्लभ भट्ट, कमला चंदोला, आशा चंदोला, ललित चंदोला, हरीश चंदोला, भुवन चंदोला, दीपक चंदोला और नंदाबल्लभ चंदोला समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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