बागेश्वर । वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि देश का बजट भले ही विकास के दावे कर रहा हो, लेकिन उत्तराखंड एक बार फिर हाशिये पर डाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से बिल्कुल अलग हैं, लेकिन बजट में इसे कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी गई।
हरीश ऐठानी ने कहा कि बजट में उत्तराखंड के लिए—
अलग हिल एरिया पैकेज की व्यवस्था नहीं की गई,
आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए स्थायी डिजास्टर फंड का प्रावधान नहीं हुआ,
पहाड़ी जिलों के युवाओं के लिए ठोस रोजगार नीति सामने नहीं आई।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पहाड़ को इस बजट से मिला क्या?
न पलायन रोकने का कोई ठोस रोडमैप,
न सीमांत गांवों के लिए उत्तराखंड-विशेष पैकेज,
न बंद होते उद्योगों और खनन से बढ़ती बेरोजगारी पर कोई जवाब।
ऐठानी ने कहा कि पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जैसे पहाड़ी जिलों की ज़रूरतें मैदानी इलाकों से अलग हैं, लेकिन बजट में एक ही नजरिया अपनाया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार हर साल नए नारे देती है—
“सिद्धि से संकल्प”, “अमृत काल”, “कर्तव्य पथ”,
लेकिन पहाड़ का युवा आज भी अपने भविष्य को लेकर असमंजस में है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आज का युवा पूछ रहा है कि हमारा भविष्य किस रास्ते पर है? क्या हमें रोज़गार मिलेगा या मजबूरी में पलायन करना पड़ेगा? उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि उत्तराखंड को केवल भाषण नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण बजट और ईमानदार नीति की जरूरत है, ताकि पहाड़ में रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विकास हो सके। ऐठानी ने चेतावनी दी कि यदि पहाड़ी क्षेत्रों की अनदेखी इसी तरह जारी रही, तो आने वाले समय में पलायन और बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हो जाएगी।








