बागेश्वर/कौसानी। समाज सेवा और पहाड़ के प्रति गहरे लगाव के लिए जाने जाने वाले डेविड हाकिन्स, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘डेविड भाई’ के नाम से जाना जाता था, 10 मार्च को उनका निधन हो गया था। वह 78 वर्ष के थे। उनके निधन से कौसानी से लेकर धरमघर तक की शांत वादियां शोकाकुल हो गई थी। उनकी स्मृति में आज कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आश्रम परिवार, सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों के लोगों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में वक्ताओं ने डेविड भाई के जीवन को याद करते हुए बताया कि उनका जन्म इंग्लैंड में हुआ था, जहां उन्होंने शिक्षा पूरी कर कुछ समय नौकरी भी की। लेकिन बचपन से ही उन्हें प्रकृति और पहाड़ों से विशेष लगाव था। गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर जब उन्होंने सरला बहन और लक्ष्मी आश्रम के बारे में जाना, तो भारत आने का निर्णय लिया। 70 के दशक में उन्होंने एक लंबी और साहसिक यात्रा करते हुए सड़क मार्ग से टर्की और अफगानिस्तान होते हुए खैबर दर्रे को पार कर भारत पहुंचे। कौसानी में कुछ समय बिताने के बाद वह इंग्लैंड लौट गए, लेकिन पहाड़ों का आकर्षण उन्हें दोबारा यहां खींच लाया। 80 के दशक में वह पुनः कौसानी आए और इस बार यहीं स्थायी रूप से बस गए। बाद में उन्होंने भारतीय नागरिकता भी ग्रहण कर ली। कौसानी में रहते हुए उन्होंने आश्रम से जुड़ी हंसी साह से विवाह किया और यहीं अपना परिवार बसाया। उनकी पुत्री दीपिका हाकिन्स की प्रारंभिक शिक्षा भी कौसानी में हुई। वर्तमान में दीपिका विदेश में रॉक क्लाइंबिंग इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन उनका जुड़ाव आज भी अपने पहाड़ से बना हुआ है। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि डेविड भाई ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का उदाहरण रहा। कार्यक्रम के दौरान दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उपस्थित लोगों ने उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए कहा कि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सभा में बड़ी संख्या में आश्रम परिवार, स्थानीय ग्रामीण और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








