बागेश्वर (उत्तराखंड)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) बागेश्वर में आयोजित पाँच दिवसीय थिएटर इन एजुकेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन तीनों विकासखण्डों के 40 प्राथमिक शिक्षकों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का समन्वयन डायट प्रवक्ता रवि कुमार जोशी द्वारा किया जा रहा है। दूसरे दिन के सत्र का नेतृत्व संदर्भदाता सिमरन नागपाल और डिंपल मेहता (Soul Diets Foundation, Delhi) ने किया, जिन्होंने शिक्षकों को सीखने के विभिन्न रूपों, समग्र अधिगम पद्धति और V.I.B.E.S. सूत्र के माध्यम से नाट्य-आधारित शिक्षण की प्रभावशाली तकनीकों से अवगत कराया। सत्र की शुरुआत इस विचार से हुई कि सीखना केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है।
शिक्षकों को बताया गया कि— चित्रांकन, कहानी-कथन, संगीत, नाट्य, भूमिका-अभिनय जैसी विधियाँ बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और सहभागिता को कई गुना बढ़ा देती हैं। प्रशिक्षणार्थियों को समूह अभ्यासों के माध्यम से यह अनुभव कराया गया कि इन सभी कलात्मक रूपों को थिएटर इन एजुकेशन में आसानी से सम्मिलित करके कक्षा-कक्ष को अधिक आकर्षक और प्रभावी बनाया जा सकता है। सत्र का मुख्य आकर्षण रहा V.I.B.E.S. सूत्र, जिसमें पाँच प्रमुख तत्व शामिल हैं—
Voice (आवाज़): कक्षा में आवाज़ के उतार-चढ़ाव और अभिव्यक्ति की कला
Imagination (कल्पना): बच्चों की सृजनात्मकता को विकसित करने की प्रक्रियाएँ
Body Language (शारीरिक भाषा): संदेश को प्रभावी बनाने में हाव-भाव की भूमिका
Environment (पर्यावरण): आसपास के परिवेश को शिक्षण संसाधन के रूप में उपयोग
Sensory (इंद्रिय अनुभव): सीखने में पाँचों इंद्रियों को शामिल करना
इन तत्वों पर आधारित गतिविधियों—जैसे वॉयस मॉड्युलेशन, कल्पनात्मक अभ्यास, रोल-प्ले और संवेदी अनुभव—में सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र के दौरान सिमरन नागपाल ने कहा कि थिएटर शिक्षण प्रक्रिया को अधिक जीवंत और सहभागितापूर्ण बनाता है, जिससे बच्चे आत्मविश्वासी और रचनात्मक बनते हैं।
डिंपल मेहता ने बताया कि समग्र अधिगम बच्चों में भावनात्मक संतुलन, टीम वर्क और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाता है।
डायट प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने दिनभर के सत्र की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि NEP 2020 बच्चों में कला-आधारित और अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर देती है, और यह प्रशिक्षण उसी दिशा का एक महत्वपूर्ण कदम है।








