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फर्जी प्रमाणपत्र से बनी नौकरी पड़ी भारी, पूर्व शाखा डाकपाल को तीन माह की सजा

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बागेश्वर। न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (गरुड़) शिवानी नाहर की अदालत ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर शाखा डाकपाल की नौकरी हासिल करने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में अधिकतम तीन माह के कठोर कारावास और कुल 14 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार हरियाणा के गुरुग्राम जिले के जनोला गांव निवासी ओम प्रकाश पुत्र बीर सिंह की 12 अगस्त 2022 को ऑनलाइन ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) भर्ती प्रक्रिया के तहत शाखा डाकघर नौघर स्टेट, कौसानी में शाखा डाकपाल के पद पर अनंतिम नियुक्ति हुई थी। नियुक्ति के समय उसने वर्ष 2016 का जम्मू-कश्मीर स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का हाईस्कूल अंकपत्र प्रस्तुत किया था।
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान जम्मू-कश्मीर बोर्ड ने संबंधित अंकपत्र को पूरी तरह फर्जी और कूटरचित बताया। इसके बाद डाक विभाग ने 6 अप्रैल 2023 को आरोपी को सेवा से बर्खास्त कर दिया। मामले में डाक निरीक्षक, गरुड़ की तहरीर पर 29 दिसंबर 2023 को थाना कौसानी में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस विवेचना के बाद 22 सितंबर 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों के बयान दर्ज कराए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 में एक माह का कठोर कारावास व ₹2,000 अर्थदंड, धारा 467 में तीन माह का कठोर कारावास व ₹8,000 अर्थदंड, धारा 468 में दो माह का कठोर कारावास व ₹3,000 अर्थदंड तथा धारा 471 में एक माह का कठोर कारावास व ₹1,000 अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने सभी सजाएं एक साथ चलाने के आदेश दिए।

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