कपकोट। लगातार बारिश से उफान पर आई नदी के बीच फंसे एक मजदूर के लिए उत्तरौड़ा के ग्राम प्रधान बीरेन्द्र कपकोटी देवदूत बनकर सामने आए। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने तेज बहाव वाली नदी में उतरकर बिहार निवासी मजदूर का सुरक्षित रेस्क्यू किया। इस साहसिक अभियान के दौरान उनके पैर में चोट भी आई, लेकिन उन्होंने घायल होने के बावजूद मजदूर की जान बचाकर मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की।
जानकारी के अनुसार कपकोट विकासखंड के उत्तरौड़ा क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसी दौरान बिहार निवासी कन्हैया 34 एक मजदूर नदी के बीच एक पत्थर में फंस गया और तेज बहाव के कारण बाहर निकलने में असमर्थ हो गया। मजदूर की जान पर मंडराते खतरे की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान बीरेन्द्र कपकोटी बिना देर किए मौके पर पहुंचे। स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। नदी का तेज बहाव किसी भी समय बड़ा हादसा कर सकता था, लेकिन ग्राम प्रधान ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने नदी के बीच फंसे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान उनका पैर भी चोटिल हो गया, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना पहले मजदूर की जान बचाने को प्राथमिकता दी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने ग्राम प्रधान के साहस और मानवीय संवेदनशीलता की जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बीरेन्द्र कपकोटी मौके पर नहीं पहुंचते तो बड़ा हादसा हो सकता था। ग्राम प्रधान बीरेन्द्र कपकोटी का यह निस्वार्थ और साहसिक कार्य पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है। विपरीत परिस्थितियों में उनका त्वरित निर्णय, मानवता के प्रति समर्पण यह साबित करता है कि संकट की घड़ी में एक जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान जनता के साथ खड़े रहने में होती है। उनके इस साहसिक कदम की क्षेत्रभर में प्रशंसा हो रही है। वही कपकोट थानाध्यक्ष प्रताप नगरकोटी ने बताया कि युवक का पुलिस एक्ट में चालान किया गया है। लगातार चेतावनी के बावजूद नदी में जाने पर कार्यवाही की गई है।








