बागेश्वर। रक्षाबंधन के पर्व को रेडक्रॉस सोसायटी ने इस बार भी अनूठे अंदाज में मनाते हुए सीमा पर तैनात भारतीय जवानों के लिए राखियां भेजीं। सोसायटी की महिला स्वयंसेवियों ने अपने हाथों से राखियां तैयार कीं और इन्हें केआरसी रानीखेत के माध्यम से सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचाने की पहल की। राखियों के साथ जवानों के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता का संदेश भी भेजा गया।
रेडक्रॉस सोसायटी की वरिष्ठ सदस्य राजेश्वरी कार्की के नेतृत्व में महिला स्वयंसेवियों ने इस अभियान को आकार दिया। उन्होंने स्वयं राखियां तैयार करने के साथ अन्य लोगों को भी इस पहल से जोड़ने का प्रयास किया। इस अभियान में जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभाग के सहयोग और समन्वय से तैयार राखियों को जवानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
हाथों से तैयार की गईं राखियां
इस अभियान की खास बात यह रही कि जवानों के लिए भेजी गई सभी राखियां बाजार से खरीदने के बजाय रेडक्रॉस सोसायटी की महिला स्वयंसेवियों ने अपने हाथों से तैयार कीं। स्वयंसेवियों ने राखियां तैयार करते समय उनमें भाई-बहन के रिश्ते के साथ देश की रक्षा में जुटे जवानों के प्रति सम्मान और अपनत्व की भावना को भी जोड़ा।
सोसायटी का कहना है कि रक्षाबंधन पर अधिकांश सैनिक अपने परिवार और बहनों से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके लिए भेजी गई राखी उन्हें यह एहसास कराने का प्रयास है कि देशवासी उनके त्याग और कर्तव्य को नमन करते हैं और उनके साथ खड़े हैं।
हर घर राखी अभियान से जोड़ी गईं बहनें
राजेश्वरी कार्की ने बताया कि इस वर्ष ‘हर घर राखी’ अभियान के तहत लोगों से देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए राखियां भेजने की अपील की गई थी। अभियान के तहत बड़ी संख्या में राखियां एकत्र हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन राखियों को केआरसी रानीखेत के माध्यम से जवानों तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक बार का अभियान नहीं है। आने वाले वर्षों में भी इस पहल को जारी रखा जाएगा और बागेश्वर की बहनों की ओर से हर रक्षाबंधन पर जवानों तक प्रेम और सम्मान के धागे पहुंचाए जाएंगे।
सीमा पर तैनाती के अनुभव को किया याद
रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन इंद्र सिंह फर्स्वाण ने कहा कि देश के सैनिक दिन-रात सीमाओं पर डटे रहकर हमारी और देश की सुरक्षा करते हैं। रक्षाबंधन जैसे पर्व पर जब वे अपने परिवार से दूर होते हैं, तब समाज की ओर से भेजी गई एक राखी भी उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस का यह छोटा सा प्रयास जवानों को यह महसूस कराने के लिए है कि पूरा देश उनके साथ है।
वहीं जिला सैनिक कल्याण अधिकारी वेद जोशी ने रेडक्रॉस सोसायटी की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह एक बेहतर और भावनात्मक पहल है। उन्होंने अपने सीमा पर तैनाती के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय भी जवानों को रक्षाबंधन के अवसर पर राखियां मिला करती थीं। अब उनके माध्यम से इन राखियों को देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर बागेश्वर की बहनों और स्थानीय लोगों की ओर से भेजी गई ये राखियां जवानों तक यहां के लोगों का स्नेह और शुभकामनाएं पहुंचाने का काम करेंगी।
रेडक्रॉस सोसायटी की इस पहल ने रक्षाबंधन के पर्व को सामाजिक सरोकार और देशसेवा की भावना से जोड़ दिया है। बागेश्वर से भेजा गया यह प्रेम का धागा अब सीमाओं पर तैनात उन जवानों की कलाई तक पहुंचेगा, जो देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवारों से दूर रहकर कर्तव्य निभा रहे हैं। इस दौरान सचिव आलोक पांडे वेद प्रकाश जोशी, कोषाध्यक्ष जगदीश उपाध्याय, मोहिनी पांडे, हिमांशु जोशी, कन्हैया वर्मा, मोहिनी कोरंगा, रोशनी रावल आदि मौजूद रहे।








