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मातृ पितृ विहीन पूजा के परिणय को आगे आये गरुड़ के लोग,बढ़चढ़ कर निभाई सामाजिकता

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विश्व स्तर पर मदर्स डे की चकाचौंध के बीच गरुड़ क्षेत्र में समाज के सहयोग से मातृ पितृ विहीन पूजा के परिणय ने सामाजिकता की अनूठी मिसाल पेश की है।
ज्ञातव्य है कि गरुड़ क्षेत्र के सीर, गागरीगोल निवासी जीवन सिंह राणा की वर्षों पूर्व जानलेवा बिमारी एड्स से मौत हो गयी उसके संक्रमण से ही कुछ वर्ष बाद जीवन की पत्नी अंजलि की भी मौत हो गयी।जीवन और अंजलि के दो मासूम बेसहारा हो गये। बच्चों के परिवारजनों ने मुँह मोड़ लिया जिन्हें अपनों ने ठुकराया उन्हें क्षेत्र के पादरी विक्टर सिंह ने अपनाया और स्वयं की मेहनत मजदूरी व समाज के सहयोग से दोनों बच्चों का लालन पालन व पढ़ाई की व्यवस्था की। दोनों बच्चों का जीवन संघर्ष के बीच गुजर होता आया है।सौभाग्य से दोनों ही बच्चे जानलेवा संक्रमण के प्रकोप से पूरी तरह मुक्त हैं।
दो दशक के संघर्षपूर्ण अंतराल बाद वयस्क हो चुके इन दो भाई बहिनों में विवाह योग्य पूजा का हाथ थामने आगे आये आये गरुड़ क्षेत्र के जखेड़ा लमचुला निवासी आनन्द सिंह के पुत्र देवेंद्र। भारतीय सेना के सैनिक देवेन्द्र ने रीति रिवाजों के बीच सादगी के साथ पूजा को अपनी जीवन संगिनी स्वीकार किया है।
कहते हैं जिसका कोई नहीं होता उसका भगवान होता है मुफलिसी में जीवनयापन कर रहे इन बच्चों के साथ गरुड़ के अग्रणी लोगों ने मानवता दिखाई और पूजा के हाथ पीले हो गये।कन्यादान में माता पिता के कर्म नौघर की ग्राम प्रधान नीमा अलमिया व उनके समाजसेवी पति मोहन सिंह अलमिया द्वारा वैदिक रीति से सम्पन्न कराये गये।
समाज और उसके लोग एकजुट हो जायें तो हर असम्भव कार्य सम्भव हो सकता है ऐसा इस विवाह के बाद सन्देश मिल सका है।इस सामाजिक कार्य में गरुड़ क्षेत्र की सिविल सोसाइटी,के अलावा नन्दन सिंह अलमिया,कैलाश अलमिया, हरीश जोशी, मंजू जोशी बी0एस0 चिलवाल, आदि अनेक लोगों की अहर्निश भागीदारी व सहयोग के प्रति पादरी विक्टर सिंह ने आभार जताया है।

संक्रामक बीमारियों से मृतकों की सन्तानों की हो उचित व्यवस्था।


पूजा राहुल की व्यवस्थाओं में जनसहयोग की पहल के आधारस्तम्भ वरिष्ठ समाजसेवी व पत्रकार हरीश जोशी का मानना है कि पूजा राहुल की तरह समाज में और भी अनेकों ऐसे जरूरतमंद बच्चे होते हैं जिनके लालन पालन व शिक्षा पुनर्वास की व्यवस्थाओं हेतु कोविड नीतियों के अनुरूप ही नियम बनाकर इस तरह के बच्चों की जरूरतें पूरी किये जाने की आवश्यकता है। रेडक्रास सोसायटी बागेश्वर के सदस्यो ने 11100 की धनराशि देकर बेटी को विदा किया।

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